


Lucknow. खरी खरी बोलने वाले और हमेशा अपने विचारों को लेकर मुखर उत्तर प्रदेश के संन्यासी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुसलमानों के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है: आपको राज्य के विकास में उचित हिस्सा मिलेगा, लेकिन सिर्फ इसलिए विशेष रियायतों की उम्मीद न करें कि आप अल्पसंख्यक हैं.
इसका मतलब साफ है कि आप सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ सकते, या कोई अवैध गतिविधि नहीं कर सकते. अगर आप ऐसा करते हैं, तो ‘बुलडोजर न्याय’ का सामना करने के लिए तैयार रहें. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के आलोचकों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड स्वार्थी हितों के साथ-साथ ‘लूट खसोट’ के अड्डा बन गए हैं और इन्होंने मुसलमानों के कल्याण के लिए बहुत कम काम किया है.
उन्होंने देश में अपनी बढ़ती लोकप्रियता, आरएसएस (जिसके वह कभी सदस्य नहीं रहे) के साथ अपने संबंधों, कुछ केंद्रीय नेताओं के साथ उनकी कथित अनबन, प्रधानमंत्री बनने की उनकी महत्वाकांक्षा, राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी और कांग्रेस पार्टी के भविष्य के बारे में भी बात की.
आदित्यनाथ ने संभावित प्रधानमंत्री के रूप में उनके प्रति बढ़ते समर्थन के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘राजनीति मेरे लिए एक ‘फुल टाइम जॉब’ नहीं है. इस समय मैं यहां काम कर रहा हूं लेकिन वास्तविकता में मैं हूं तो एक योगी ही.’
यह पूछे जाने पर कि उनकी राजनीति में कब तक बने रहने की योजना है, मुख्यमंत्री ने कहा, ‘इसकी भी एक समयसीमा होगी.’ मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका प्राथमिक काम उत्तर प्रदेश के लोगों की सेवा करना है जो उनकी पार्टी ने उन्हें सौंपा है. उन्होंने कहा, ‘मैं उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं और पार्टी ने मुझे राज्य के लोगों की सेवा करने के लिए यहां रखा है.
मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव को किया खारिज
योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व को लेकर अपने कट्टर विचारों और अपराधियों के खिलाफ सख्त प्रशासक की छवि के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बनकर उभरे हैं. उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव को लेकर आलोचनाओं को खारिज किया. उन्होंने कहा कि राज्य की आबादी में मुसलमानों की संख्या 20 प्रतिशत है लेकिन सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों में उनकी हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत है. आदित्यनाथ ने कहा कि वह न तो भेदभाव में विश्वास करते हैं और न ही तुष्टीकरण में.
सड़कों पर नमाज अदा करने पर बोले
मेरठ में सड़कों पर नमाज अदा करने के खिलाफ उनके प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी पर उठे विवाद के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने सरकार के कदम का दृढ़ता से बचाव करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है.
उन्होंने कहा, ‘सड़क चलने के लिए होती है और जो लोग (इस फैसले के खिलाफ) बोल रहे हैं उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए. कुल 66 करोड़ लोग प्रयागराज में (महाकुंभ में) आए. कहीं कोई लूटपाट नहीं, कहीं कोई आगजनी नहीं, कहीं कोई छेड़खानी नहीं, कहीं कोई तोड़फोड़ नहीं, कहीं कोई अपहरण नहीं, यह होता है अनुशासन…यह है धार्मिक अनुशासन…अगर आपको सुविधा चाहिए तो उस अनुशासन को भी मानना सीखिए.’
‘बुलडोजर मॉडल’
त्वरित न्याय के तौर पर उनके ‘‘बुलडोजर मॉडल’’ को अब अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है, हालांकि इसकी वैधता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. आदित्यनाथ ने इस मामले में कहा कि वह इस मॉडल को उपलब्धि नहीं बल्कि आवश्यकता मानते हैं. उन्होंने कहा कि बुलडोजर का उपयोग बुनियादी ढांचे का निर्माण करने और अतिक्रमण हटाने के लिए भी किया जा सकता है. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने उसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना सिखाया है. आदित्यनाथ ने दावा किया कि ‘बुलडोजर कार्रवाई’ के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की कोई भी प्रतिकूल टिप्पणी उनके राज्य से संबंधित नहीं है.



