


स्मृति शेष : संपदा सिंह
- 953 में पटना में साधारण दवा दुकान से संघर्ष की शुरुआत, लक्ष्मी फार्मा से आगे बढ़कर 1960 में डाली फार्मास्युटिकल्स डिस्ट्रिब्यूशन फर्म “मगध फार्मा” की नींव
संप्रदा सिंह का जन्म 1925 में बिहार के जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड के ओकरी गांव में हुआ था. संप्रदा सिंह ने पटना यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई की. वह मेडिकल के क्षेत्र में कुछ करना चाहते थे.
पहले नौकरी की फिर बनाई कंपनी
संप्रदा सिंह की पहचान भले ही देश के बड़े और मशहूर उद्योगपतियों के तौर पर होती है लेकिन बहुत कम लोगों को ये पता है कि उन्होंने भी अपने करियर की शुरूआत एक केमिस्ट शॉप पर नौकरी से की थी. उन्होंने 1953 में पटना में एक साधारण दवा दुकान से अपने संघर्ष की शुरुआत की. वह इस कारोबार को बड़ी बारीकी से समझने लगे. उसके बाद पार्टनरशिप मे लक्ष्मी फ़ार्मा की नींव डाली. 1960 में उन्होंने फार्मास्युटिकल्स डिस्ट्रिब्यूशन फर्म “मगध फार्मा” की नींव डाली.
पटना के बाद मुंबई का किया रूख
संप्रदा सिंह की मेहनत से उनके कई देसी-विदेशी दवा कंपनियों से अच्छे रिश्ते बन गए. वो जल्द ही डिस्ट्रीब्यूटर बन गए लेकिन उनको सिर्फ दवा नहीं बेचनी थी. तभी उनके दिमाग में आया कि क्यों न खुद दवाई बनाई जाए. इसी सपने के साथ 1973 में वो मुंबई चले गए.जहां उन्होने अपनी कंपनी “एल्केमलेबोरेटरीज” (Alkem Laboratories) की नींव डाली. शुरू में कई संघर्ष का सामना करने के बाद उनका संघर्ष 1989 में रंग लाया. दरअसल, उनकी कंपनी ने “एंटीबायोटिक कंफोटेक्सिम का जेनेरिक वर्जन टैक्सिम” बना लिया था. कंफोटेक्सिम की इन्वेंटर कंपनी मेरिओनरूसेल को लगा कि एल्केम बहुत छोटी कंपनी है. ये ज्यादा दिन टिक नहीं पाएगी. लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और किफायती मूल्य की वजह से उनकी “टैक्सिम” ने बाजार में तहलका मचा दिया.
2017 में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
आज की तारीख में संप्रदा सिंह की एल्केम लेबोरेटरीज, फार्मास्युटिकल्स और न्यूट्रास्युटिकल्स बनाती है. वहीं इसका कारोबार 30 से ज्यादा देशों में है. 2017 में फोर्ब्स इंडिया (Forbes India List) ने संप्रदा सिंह को देश के टॉप 100 भारतीय धनकुबेरों में 52वां स्थान दिया था. उस समय संप्रदा सिंह 3.3 अरब डॉलर के मालिक थे. फोर्ब्स में शामिल होने वाले बिहार के पहले कारोबारी थे. वहीं इस लिस्ट में दुनिया के जाने-माने कारोबारी मुकेश अंबानी के भाई अनिल अंबानी संप्रदा सिंह से पीछे थे. आखिरी सालों तक उनका कारोबारी जुनून देखते बनता था. संप्रदा सिंह को दुनियाभर के कई सम्मान भी मिल चुके हैं.
चंदन कुमार, मुंबई, 9594363649



