



Jamshedpur. श्रावण मास में दलमा स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर में श्रद्धालुओं से वन विभाग द्वारा एंट्री फीस वसूली का मामला तूल पकड़ रहा है. विश्व हिंदू परिषद समेत कई हिंदू संगठनों ने इस निर्णय का विरोध किया है. वन विभाग द्वारा चेक नाका पर 10, 50 और 150 रुपए लिए जा रहे हैं. विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अजय गुप्ता ने इसे तुगलकी फरमान करार दिया है. उन्होंने कहा कि श्रावण माह में लाखों श्रद्धालु शिवालयों की यात्रा करते हैं. ऐसे में भक्तों से शुल्क लेना उचित नहीं है. उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस निर्णय को तत्काल रद्द करने की मांग की है. अरुण सिंह ने सरायकेला के डीसी से हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार को सनातन परंपरा से खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने एंट्री फीस को तुरंत रोकने की मांग की है.
इधर, डीएफओ सब आलम ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह सरकार का निर्णय है. यह नियम कई वर्षों से चला आ रहा है. एंट्री फीस से प्राप्त राशि का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किया जाता है.

भाजपा ने जताया विरोध
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने कह, सनातनी आस्था पर टैक्स अविलंब समाप्त किया जाए. यह धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग किया कि इस आधुनिक युग के जजिया टैक्स को अविलंब समाप्त किया जाये और हिंदू आस्था से खिलवाड़ बंद हो. भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को सनातन परंपरा और श्रद्धा से खेलने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने सरायकेला जिले के उपायुक्त से इस प्रकरण में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए अविलंब रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जहां राज्य सरकार देवघर और बासुकिनाथ में करोड़ों रुपये खर्च कर श्रावणी मेले में भक्तों को सुविधा मुहैया करा रही है, वहीं जमशेदपुर डीएफओ शिव भक्तों से इंट्री फ़ीस वसूल रहे हैं.



