


Ranchi. झारखंड में अवैध कोयला कारोबार का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए सनसनीखेज दावे किए हैं. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रदेश में कोयला चोरी अब केवल अपराधियों का काम नहीं रहा, बल्कि यह पुलिस प्रशासन और कोल माफिया की संगठित साझेदारी में चलाया जा रहा एक व्यापक अवैध व्यापार बन गया है. उन्होंने दावा किया कि पहले चोर चोरी करके पुलिस तक कमीशन पहुंचाते थे, लेकिन अब पुलिस और माफिया मिलकर इस धंधे को आगे बढ़ा रहे हैं.
बाबूलाल मरांडी ने बताया, ‘धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार ने वसूली का एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम बना रखा है. जिले के थानेदार, डीएसपी, सीओ से लेकर माइनिंग ऑफिसर तक सबका हिस्सा तय है. इस वसूली सिंडिकेट के राइट हैंड है बाघमारा डीएसपी पुरुषोत्तम सिंह और लेफ्ट हैंड़ है इंस्पेक्टर अजीत भारती. ये दोनों मिलकर मलाईदार थानों की बोली लगाते हैं और जो सबसे ज्यादा बोली लगाता है, उसे ही थानेदारी मिलती है. डीएसपी पुरुषोत्तम सिंह, जो पूर्व में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में रहे हैं, अपनी उस पहुंच का धौंस जमाकर वसूली करते हैं. इनका खौफ इतना है कि सभी माइनिंग साइट्स में इन्होंने 50% की पार्टनरशिप जबरन ले रखी है.
कोड वर्ड में चल रहा कोयले का धंधा
झारखंड ने नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, ‘धनबाद में कोयले का काला साम्राज्य कोई नई बात नहीं है, लेकिन मौजूदा सरकार में इसका चरित्र पूरी तरह बदल गया है. पहले माफिया चोरी करता था और पुलिस को कमीशन देता था. आज स्थिति यह है कि पुलिस और प्रशासन ने माफिया को हटाकर खुद माफिया का चोला पहन लिया है अब साझेदारी नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारी सीधे तौर पर कोयला खदानें चला रहे हैं. आज हम उस सिंडिकेट का पर्दाफाश कर रहे हैं जो धनबाद में कोड-वर्ड्स के जरिए चल रहा है। असली अपराधी पकड़े न जाएं, इसलिए गुर्गों को कोड नेम दिए गए हैं। मैं आपको सिलसिलेवार बताता हूं कि कौन सी साइट, किस कोड नेम से, किस अधिकारी के संरक्षण में चल रही है.
बाबूलाल मरांडी ने बताया, ‘सबसे पहले ‘भौरा साइट’, जिसे ‘अरविंद’ और ‘करण’ नाम के कोड वर्ड वाले दो लोग चला रहे हैं. ये दोनों सीधे तौर पर धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार के आदमी हैं. दूसरी है ‘कुजामा साइट’. यहां तीन कोड वर्ड काम कर रहे हैं- ‘आकाश’, ‘मनीष’ और ‘अजय’. इसमें ‘आकाश’ एसएसपी धनबाद का आदमी है, ‘अजय’ कुंभनाथ सिंह का आदमी है और ‘मनीष’ मुकेश सिंह का आदमी है. तीसरी ‘पंचेत साइट’, जिसे ‘अंजनी’ नाम के कोड वर्ड से चलाया जा रहा है. यह व्यक्ति पंकज मिश्रा का आदमी है. चौथी ‘निरसा साइट’, जिसे संजय सिंह चला रहा है. यह उसका असली नाम है और यह भी धनबाद एसएसपी का खास आदमी है. पांचवीं ‘गोपालीचक’ और ‘बायसबारा साइट’, जिसे कौशल पांडे चला रहा है। यह भी एसएसपी धनबाद का ही आदमी है.
बाबूलाल ने की जांच की मांग
राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार से इस कथित पुलिस-कोयला माफिया गठजोड़ की जांच की मांग की. भाजपा नेता ने कहा कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार इस मामले में शामिल नहीं है, तो तुरंत जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि कोयला लूट में कौन-कौन शामिल हैं.
झामुमो बोला-राज्य में कानून का शासन है
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने इन आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा, “झारखंड में कानून का शासन है और किसी भी स्तर पर अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है.



