


Jamshedpur. जमशेदपुर के अतिक्रमण के मामले में बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह और न्यायाधीश राजेश शंकर की पीठ में हुई. सुनवाई के बाद अदालत ने जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी (जेएनएसी) के शपथपत्र पर प्रार्थी को प्रति उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है.
जेएनएसी ने तीसरी बार उच्च न्यायालय की सीधी अवमानना की और अदालत ने जो जानकारियां जेएनएसी को देने को कहा था उसे जेएनएसी ने नहीं दिया. सुनवाई के दौरान जेएनएसी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वे लोग एनक्रोचमेंट के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, जुर्माना वसूला है. टाटा स्टील को चिठ्ठी लिखी कि बिना कम्पलीशन सर्टिफिकेट के बिजली पानी क्यों दिया.
अदालत ने पूछा कि टाटा स्टील या टाटा स्टील यूआइएसएल (पहले जुस्को) को म्युनिसिपल कानून की जानकारी थी तो अवैध बिल्डिंगों की बिजली पानी काटी क्यों नहीं गयी? अदालत ने जेएनएसी से यह भी पूछा कि जेएनएसी ने टाटा स्टील या टाटा स्टील यूआइएसएल को कब चिठ्ठी लिखी कि अवैध बिल्डिंगों की बिजली और पानी का कनेक्शन काटा जाये? अदालत के सवालों का जवाब नहीं देने पर अदालत ने पीटीशनर के अधिवक्ता से पूछा कि वे अपना रिज्वांईडर कितने दिनों में दायर कर सकते हैं? अधिवक्ता ने 3 दिनों का वक्त मांगा पर अदालत ने 7 दिनों का वक्त मुकर्रर करते हुए यह व्यवस्था दी कि पीटीशनर का हलफनामा दायर होने के तुरंत बाद इस पीटीशन पर फिर सुनवाई होगी.
पीटीशनर की तरफ से प्रार्थी के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और नेहा अग्रवाल ने अदालत को बताया कि सिर्फ साकची बाजार में फुटपाथ के दुकानदारों को हटाया गया. लेकिन फिर से वहां पर कब्जा हो गया है। कहा कि बिष्टुपुर में तीन मंजिला पार्किंग भवन बनाया जाना था. लेकिन वहां पर व्यवसायिक कांप्लेक्स बना दिया गया है, जिसमें फुटपाथ तक की जमीन पर कब्जा किया गया है. इस पर अदालत ने उक्त जानकारी कोर्ट के रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है.
बता दें कि राकेश झा की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है. पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जेएनएसी से पूछा था कि जमशेदपुर में जिन भवनों ने पार्किंग पर कब्जा किया और जिन बिल्डरों ने अवैध निर्माण किया है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की है. अदालत ने इसका टेबुलर चार्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा था.लेकिन जेएनएसी की ओर से पूरी जानकारी नहीं दी गई है.



