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Home»Headlines»Supreme Court : चुनाव आयोग की दलील, ‘मतदाता सूची का एसआईआर कराना EC का अधिकार…
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Supreme Court : चुनाव आयोग की दलील, ‘मतदाता सूची का एसआईआर कराना EC का अधिकार…

News DeskBy News DeskJanuary 7, 2026
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नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसके पास मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने का पूरा अधिकार और क्षमता है. साथ ही यह उसकी सांविधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक मतदाता के रूप में दर्ज न हो. आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष यह दलील रखी.

पीठ ने उन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई फिर शुरू की, जिनमें बिहार समेत कई राज्यों में एसआईआर कराने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है. इन याचिकाओं में आयोग की शक्तियों की सीमा, नागरिकता और मतदान के अधिकार से जुड़े सांविधानिक सवाल उठाए गए हैं.

वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि संविधान के अनुसार राज्य के तीनों अंगों के सभी प्रमुख सांविधानिक पदों पर बैठे लोगों का भारतीय नागरिक होना जरूरी है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति से जुड़े संविधान के अनुच्छेद 124(3) का भी हवाला दिया.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष सांविधानिक पदों पर नियुक्ति की एक मुख्य शर्त यह है कि व्यक्ति भारतीय नागरिक हो. द्विवेदी ने कहा, सभी अहम नियुक्तियां तभी हो सकती हैं जब व्यक्ति नागरिक हो. हमारा संविधान मुख्य रूप से नागरिक-केंद्रित है.

सांविधानिक व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब संविधान ‘नागरिक’ शब्द का इस्तेमाल करता है, तो इसकी जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची में कोई भी विदेशी शामिल न हो, यह सुनिश्चित करना सांविधानिक कर्तव्य है.

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वरिष्ठ वकील ने कहा कि चुनाव आयोग का काम राजनीतिक दलों की बयानबाजी का जवाब देना नहीं है. उन्होंने कहा, हम राजनीतिक दलों पर टिप्पणी नहीं कर रहे. हमारा कर्तव्य सिर्फ इतना है कि मतदाता सूची में कोई विदेशी न हो. यह देखना जरूरी है कि हमारे पास यह शक्ति और क्षमता है.

अपनी दलील आगे बढ़ाते हुए द्विवेदी ने एक अहम सांविधानिक सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि क्या संविधान का अनुच्छेद 324 (जो चुनाव आयोग को चुनावों की निगरानी, दिशा और नियंत्रण की शक्ति देता है) कानून के प्रावधानों से पूरी तरह खत्म हो जाता है या इसे हर मामले में अलग-अलग देखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 को साथ पढ़ने पर यह नहीं कहा जा सकता कि मतदाता सूची के संशोधन के मामले में चुनाव आयोग का अधिकार खत्म हो जाता है. द्विवेदी ने कहा, यह क्षेत्र पूरी तरह बंद नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग के पास सांविधानिक अधिकार बने रहते हैं.
एसआईआर को लेकर टीएमसी सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर किया

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मनमानी और प्रक्रिया संबंधी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया है.

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आवेदन में कहा गया है कि राज्य में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से चुनाव आयोग जमीनी स्तर के अधिकारियों को लिखित आदेश देने के बजाय व्हाट्सएप संदेशों और वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान मौखिक निर्देश दे रहा है.

आवेदन में कहा गया, चुनाव आयोग मनमाने तरीके से या कानून से बाहर जाकर काम नहीं कर सकता और न ही कानूनी रूप से तय प्रक्रियाओं की जगह अस्थायी या अनौपचारिक तरीकों को अपना सकता है. डेरेक ओ’ब्रायन ने पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में एसआईआर कराने के लिए चुनाव आयोग की ओर से जारी आदेशों और दिशा-निर्देशों को चुनौती दी है.

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