


जमशेदपुर।
पिछले कई महीनों से चक्रधरपुर रेल मंडल के अंतर्गत चलने वाली यात्री ट्रेनों के लगातार विलंब से आम यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर कांड्रा, बिरराजपुर, गम्हरिया और आदित्यपुर से होकर टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली ट्रेनों की लेटलतीफी अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इस मुद्दे को लेकर जमशेदपुर के सांसद बिद्युत बरण महतो ने कड़ा रुख अपनाते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर ट्रेनों के समयपालन को दुरुस्त करने की मांग की है।
3–5 घंटे की देरी से यात्री त्रस्त
सांसद ने पत्र में उल्लेख किया है कि बीते लगभग एक वर्ष से इन सेक्शनों में यात्री ट्रेनों को गंतव्य तक पहुंचने में 3 से 4 घंटे अतिरिक्त लग रहे हैं, जबकि कई बार यह देरी 5 घंटे तक भी पहुंच जाती है। रोजाना सफर करने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आम यात्रियों को इससे अत्यधिक परेशानी हो रही है। यात्रियों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान सामने नहीं आ सका है।
संसद और रेल मंत्री तक उठाया गया मुद्दा
सांसद बिद्युत बरण महतो ने बताया कि उन्होंने यह विषय कई बार स्थानीय रेल अधिकारियों, विभिन्न पैसेंजर एसोसिएशन, सामाजिक संगठनों और चैंबर ऑफ कॉमर्स के समक्ष उठाया है। इसके अलावा संसद के सदन में भी यह मामला रखा गया और केंद्रीय रेल मंत्री से मुलाकात कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया गया। मंडल रेल प्रबंधक, चक्रधरपुर से भी इस विषय पर वार्ता और पत्राचार किया गया, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों को राहत नहीं मिल पाई, जिससे आम जनता में रेल प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।
महाप्रबंधक ने बताई देरी की वजह
सांसद के पत्र पर संज्ञान लेते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक ने जवाबी पत्र भेजकर देरी के कारणों और समाधान की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की है। महाप्रबंधक के अनुसार, कांड्रा से टाटानगर सेक्शन में ट्रेनों की असामान्य देरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। इनमें एलिफेंट कॉशन ऑर्डर, रेल परिचालन को बेहतर बनाने के लिए चल रहे मूलभूत ढांचागत विकास कार्य और हाल के दिनों में पड़े घने कोहरे का असर शामिल है, जिससे ट्रेनों की गति और समयनिष्ठा प्रभावित हुई है।
असामाजिक गतिविधियां भी बनीं बाधा
महाप्रबंधक ने यह भी बताया कि चक्रधरपुर–टाटा एवं चांडिल–टाटा रेल खंड में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां और ट्रेनों में जंजीर खींचने (ACP) की घटनाएं भी देरी का एक बड़ा कारण हैं। हाल ही में 9 जनवरी 2026 को चक्रधरपुर मंडल के सीली–महाली मारूप क्षेत्र में सिग्नल गुमटी में घुसकर केबल चोरी की घटना हुई, जिससे 22 लंबी दूरी की ट्रेनें असामान्य रूप से लेट हो गईं। सुबह 01:50 बजे से 08:30 बजे तक सभी लाइनों पर सिग्नल फेल रहा। हालांकि इस मामले में रेलवे सुरक्षा बल ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
समाधान के लिए तीन स्तरों पर योजना
दक्षिण पूर्व रेलवे ने ट्रेनों को समय से चलाने के लिए तत्काल, मध्यम और दीर्घकालिक उपायों की घोषणा की है।
तत्काल उपायों में साउथ बिहार एक्सप्रेस में दोनों सिरों पर इंजन का उपयोग, मालगाड़ी इंजनों की आवाजाही को तर्कसंगत बनाना, ट्रेनों की कड़ी निगरानी और सीनी स्टेशन पर सीमित ठहराव शामिल है।
मध्यम अवधि में सीनी यार्ड का संशोधन और AI आधारित थर्मल कैमरा से हाथियों की निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।
दीर्घकालिक योजना के तहत टाटानगर यार्ड में चार नए प्लेटफॉर्म, सीनी और राजखरसवां के बीच बहु-लाइन निर्माण तथा रेल ओवर रेल (RoR) परियोजनाओं को शामिल किया गया है।
रेलवे प्रशासन का दावा है कि इन सभी उपायों के लागू होने से चक्रधरपुर मंडल में ट्रेनों की परिचालन दक्षता और समयपालन में उल्लेखनीय सुधार होगा। सांसद बिद्युत बरण महतो ने भी उम्मीद जताई है कि यह कार्ययोजना जल्द धरातल पर उतरेगी और यात्रियों को लंबे समय से चली आ रही समस्या से राहत मिलेगी।



