


Patna. बिहार में मंगलवार को एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत होने जा रही है। राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार इस्तीफा दे सकते हैं और प्रदेश में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में सरकार बनने की राह साफ हो सकती है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रमुख कुमार ने पिछले सप्ताह राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी और वह कैबिनेट की अंतिम बैठक के बाद अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। यह बैठक सुबह 11 बजे निर्धारित है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, ‘‘यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिलने से पहले अपने सहयोगियों को कैबिनेट भंग करने के निर्णय की जानकारी देते हैं। 243 सदस्यीय विधानसभा में 89 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद पार्टी अपने विधायक दल के नेता का चुनाव करेगी, जिसके लिए बैठक अपराह्न तीन बजे भाजपा कार्यालय में प्रस्तावित है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जिन्हें भाजपा संसदीय बोर्ड ने पर्यवेक्षक नियुक्त किया है, इस प्रक्रिया के लिए पटना पहुंचने वाले हैं। 202 विधायकों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में जदयू के 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19 और हिंदुस्तान आवामी मोर्चा के पांच विधायक शामिल हैं। इन दलों का नेतृत्व क्रमशः चिराग पासवान और जीतन राम मांझी करते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पांच विधायक भी गठबंधन का हिस्सा हैं, इस पार्टी के प्रमुख हैं उपेंद्र कुशवाहा।
सभी राजग विधायक शाम चार बजे विधानसभा के केंद्रीय कक्ष में बैठक करेंगे। इसके बाद सभी घटक दलों के समर्थन का औपचारिक ऐलान किया जाएगा और नयी सरकार बनाने का दावा राज्यपाल के पास पेश किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। वह पार्टी की प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष हैं और गृह विभाग संभाल रहे हैं।
हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व की ओर से किसी “चौंकाने वाले” फैसले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता जैसा हाल ही में राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश में देखा गया था।



