


Seraikella- Kharsawan:अपनी लंबित मांगों को लेकर झारखंड आंदोलनकारियों का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी कफन ओढ़कर धरना स्थल पर बैठे और सरकार व प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए जल्द वार्ता कर मांगों का समाधान करने की मांग की।
धरना के दौरान आंदोलनकारी धनपति सरदार ने कहा कि कफन ओढ़कर विरोध प्रदर्शन करना अत्यंत गंभीर और सांकेतिक कदम है। यह केवल विरोध नहीं, बल्कि अपनी मांगों के प्रति अंतिम प्रतिबद्धता और लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा के खिलाफ आंदोलनकारियों की पीड़ा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं जहां उन्हें अपनी जान की भी परवाह नहीं रही और वे अपने अधिकारों एवं सम्मान की लड़ाई अंतिम दम तक लड़ने को तैयार हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन लगातार झारखंड आंदोलनकारियों की मांगों की अनदेखी कर रहे हैं। उनकी आवाज को बार-बार नजरअंदाज किए जाने के कारण आंदोलनकारियों को इस प्रकार का विरोध प्रदर्शन करने के लिए विवश होना पड़ा है।
धनपति सरदार ने कहा कि सरायकेला-खरसावां झारखंड आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां के आंदोलनकारियों ने अलग झारखंड राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन आज वही आंदोलनकारी अपने अधिकारों और सम्मान की मांग को लेकर धरना देने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से शीघ्र वार्ता कर आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
धरना में राजेश मुंदरी, योगेश्वर बेसरा, तारापाड़ा महतो, जन्मजय मंडल, शीला मालती टुडू, बिजली, शमशान सिंह मुंडा, भगत बेसरा, लखन मुड़िया, दीपक प्रधान, दादीकुई, विजय, वीरेंद्र, लखन, लाभों महतो, बया सरदार, सोनाराम सोरेन, गोपाल, कृष्ण, सिलाई, पंचा सरदार, हरिचरण पांडेया सहित बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलनकारी उपस्थित रहे।


