



जमशेदपुर। भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा से अपने लंबे जुड़ाव को आगे बढ़ाते हुए भारत के प्रमुख पैकेज्ड आटा ब्रांड आशीर्वाद ने ‘गुणात्मक परंपरा’ अभियान की शुरुआत की है। यह पहल भगवान जगन्नाथ के पवित्र रथों का निर्माण करने वाले विश्वकर्मा महाराणा समुदाय की सदियों पुरानी कारीगरी, समर्पण और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। ‘गुणात्मक परंपरा’ का अर्थ है ‘गुणवत्ता की परंपरा’। इस विशेष अनुभव का उद्घाटन प्रसिद्ध ओड़िया अभिनेत्री एलिना सामंतराय की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने विश्वकर्मा महाराणा समुदाय के कारीगरों और श्रद्धालुओं से मुलाकात कर इस पहल की सराहना की। एलिना सामंतराय ने कहा कि ‘गुणात्मक परंपरा’ केवल ओडिशा की समृद्ध संस्कृति का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन कारीगरों के अद्भुत कौशल को भी सम्मान देती है, जिन्होंने इस पवित्र परंपरा को जीवित रखा है। आईटीसी लिमिटेड के फूड्स डिवीजन, स्टेपल्स बिजनेस यूनिट के चीफ एग्जीक्यूटिव अनुज रुस्तगी ने कहा कि आशीर्वाद हमेशा गुणवत्ता, भरोसे और पोषण का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा महाराणा समुदाय की उत्कृष्ट कारीगरी और गुणवत्ता के प्रति उनका समर्पण आशीर्वाद के मूल्यों से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के माध्यम से ब्रांड न केवल सांस्कृतिक विरासत का सम्मान कर रहा है, बल्कि अपने ‘क्वालिटी की गारंटी’ के वादे को भी मजबूत कर रहा है। मालूम हो कि यह अभियान पीढ़ियों से चली आ रही शिल्पकला और आशीर्वाद के ‘क्वालिटी की गारंटी’ के वादे को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करता है। इस अनुभव के माध्यम से लोगों को भगवान जगन्नाथ के रथ निर्माण की जटिल प्रक्रिया और उससे जुड़ी परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। हर वर्ष विश्वकर्मा महाराणा समुदाय अपने कौशल और परंपरागत ज्ञान से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों का निर्माण करता है। इस विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने में समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस अभियान का प्रमुख आकर्षण रथ के पहिये और पारंपरिक पत्थर की चक्की के बीच दर्शाया गया प्रतीकात्मक संबंध है। जहां रथ का पहिया भगवान जगन्नाथ की दिव्य यात्रा का प्रतीक है, वहीं चक्की भारतीय घरों में शुद्धता, गुणवत्ता और पोषण की पहचान मानी जाती रही है।


