



Ranchi.झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने शुक्रवार को विधानसभा में हंगामा किया जिसके कारण अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। मानसून सत्र के दूसरे दिन कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायक आसन के समीप आ गए और ”मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पद छोड़ो” जैसे नारे लगाने लगे। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की अदालत की निगरानी वाली समिति के तहत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग की। भाजपा विधायकों के हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने उनसे अपनी सीट पर लौटने का आग्रह किया। प्रश्नकाल के दौरान अध्यक्ष के बार-बार आग्रह करने के बावजूद विपक्षी विधायक अपनी सीटों पर नहीं लौटे जिसके बाद महतो ने सदन की कार्यवाही अपराह्न साढ़े 12 बजे तक स्थगित कर दी।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी हंगामा जारी रहा। सदन की कार्यवाही नहीं चल पाने पर अध्यक्ष ने इसे दिनभर के लिए स्थगित कर दिया। विधानसभा की कार्यवाही अब 10 अगस्त को फिर शुरू होगी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की अदालत की निगरानी वाली समिति के तहत सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग की। वहीं, कांग्रेस ने दावा किया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ”पहले ही अपनी विश्वसनीयता खो चुका है और केंद्र का औजार बन गया है।”
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा, ”हम भी छात्रों के मुद्दों को लेकर चिंतित हैं। मामले की जांच अपराध जांच विभाग (सीआईडी) कर रहा है। आप (विपक्ष) सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं लेकिन केंद्रीय एजेंसी पहले ही अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है और केंद्र के औजार के रूप में काम कर रही है।”
झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार विपक्ष की चिंताओं से अवगत है और इन मुद्दों का समाधान करना चाहती है। कुमार ने विपक्षी विधायकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें ”झारखंड लोक सेवा आयोग की पहली और दूसरी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं” को भी याद करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ”उस समय भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों को नौकरियां मिली थीं।”
इस बीच, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन शुक्रवार को 14वें दिन भी जारी रहा और छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर हैं।
दो छात्र संगठनों ने दिन में राज्य विधानसभा तक मार्च निकालने की भी घोषणा की। प्रदर्शनकारी छात्रों तथा नौकरी के अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर चर्चा करने और मुद्दों का समाधान निकालने के लिए राज्य सरकार की ओर से उन्हें कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है।
प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो अथवा राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीशों के एक पैनल से स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग कर रहे हैं।
वे झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधार की मांग भी कर रहे हैं।

