

Mumbai. घरों में बनने वाले भोजन की लागत अगस्त में मामूली रूप से बढ़ गई। शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर एक प्रतिशत बढ़कर 29.5 रुपये रही, जबकि मांसाहारी थाली की लागत पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। क्रिसिल इंटेलिजेंस की मंगलवार को जारी मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, खाद्य तेल, चावल और रसोई गैस (एलपीजी) की ऊंची कीमतों ने थाली की लागत को ऊंचा बनाए रखा। हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट से कुल बढ़ोतरी सीमित रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43 प्रतिशत बढ़कर 40 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 28 रुपये प्रति किलोग्राम थी। महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण प्याज की कीमत बढ़ी।
इस दौरान खाद्य तेल की कीमत में 11 प्रतिशत और एलपीजी यानी रसोई गैस की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, आलू की कीमत 12 प्रतिशत और टमाटर की कीमत 28 प्रतिशत घटने से थाली की लागत में कुल बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिली। इसके परिणामस्वरूप शाकाहारी थाली की लागत में सालाना और मासिक दोनों आधार पर एक-एक प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई।
मुर्गे के मांस की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण मांसाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर पांच प्रतिशत बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। हालांकि, जुलाई की 58.3 रुपये की लागत की तुलना में अगस्त में यह एक प्रतिशत कम रही। क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा ने कहा, ‘‘अगले दो-तीन महीनों तक प्याज की कीमतें ऊंची बनी रहने का अनुमान है। इसकी वजह रबी फसल की कम आपूर्ति और खरीफ फसल की आवक में देरी है।’’
मासिक आधार पर अगस्त में प्याज की कीमत 17 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन टमाटर की कीमत में सात प्रतिशत की गिरावट से इसका असर सीमित रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुओं के लिए पवित्र माने जाने वाले श्रावण माह के कारण मुर्गे के मांस की कीमत में चार प्रतिशत की मासिक गिरावट आई। इससे अगस्त में मांसाहारी थाली की लागत जुलाई के मुकाबले एक प्रतिशत घट गई।

