New Delhi. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और विभिन्न गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर सोमवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर ने भी यह याचिका दायर की है।
उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार याचिका शाम के समय दायर की गई। विपक्षी दलों के सांसदों और नेताओं ने सोमवार को सैकड़ों समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ उच्चतम न्यायाल तक अपना ‘लोकतंत्र मार्च’ शुरू किया, जिसका उद्देश्य ‘वोट चोरी’ के आरोपों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर करना था। इस मार्च का नेतृत्व करने वालों में राहुल गांधी, खरगे, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी. राजा, माकपा के नेता एम. ए. बेबी, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, राकांपा (शप) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेताई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल थे।
सूत्रों ने रविवार को बताया कि इससे पहले भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर राहुल गांधी से मिलने से इनकार कर दिया था।
सूत्रों ने रविवार को बताया कि इससे पहले भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर राहुल गांधी से मिलने से इनकार कर दिया था।
उन्होंने कहा था कि इस तरह के मामले उच्चतम न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के तहत पहले से विचाराधीन हैं। राहुल गांधी और खरगे ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर सोमवार को शाम चार से छह बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। वे उन्हें एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे, जिसमें ‘वोट चोरी’ रोकने, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने और फिर से मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग की गई थी।

