चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सोमवार को विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय की गैलरी-4 में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत–100 वीक्स अभियान’ के तहत आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसमें 110 एनएसएस स्वयंसेवकों के अलावा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

युवा देश का भविष्य, नशामुक्त समाज के निर्माण में निभाएं भूमिका: कुलपति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सबसे बड़ी शक्ति भी हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने की अपील की।
कुलपति ने कहा कि युवाओं को स्वयं नशे से दूर रहने के साथ अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना चाहिए। युवाओं की सकारात्मक पहल से नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण को गति मिल सकती है।
‘नशे को ना, जिम्मेदारी को हां’ का दिया संदेश
कार्यक्रम के संसाधन व्यक्ति डॉ. धर्मेंद्र रजक ने नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए युवाओं को जागरूक नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। केवल व्यक्तिगत स्तर पर नशे से दूर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी जरूरी है।
उन्होंने संदेश दिया, “नशे को ना, जिम्मेदारी को हां—जागरूक युवा ही नशामुक्त समाज और विकसित भारत की पहचान हैं।”
स्थानीय समुदायों में शराब सेवन के सामाजिक पहलुओं पर चर्चा
विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के डॉ. बसंत चाकी ने स्थानीय समुदायों में शराब सेवन से जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि इस विषय को समझने के लिए स्थानीय समुदायों के अनुभवों और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
वहीं, एनएसएस निदेशक डॉ. मीनाक्षी मुंडा ने शराब सेवन के सामाजिक कारणों और उसके दुष्परिणामों पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।
विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेताओं को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र, भूगोल, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग तथा टीआरआई से जुड़े उन शिक्षण सहायकों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने-अपने विभागों में विश्वविद्यालय स्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त किया था।
सम्मानित प्रतिभागियों को विद्यार्थियों के सामने प्रेरणास्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा, अनुशासन और निरंतर मेहनत से युवा अपनी प्रतिभा को नई पहचान दे सकते हैं।
चुर, पिट्टो और खो-खो से दिया स्वस्थ जीवनशैली का संदेश
जागरूकता कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के लिए पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। इसमें चुर, पिट्टो और खो-खो जैसे खेल शामिल थे।
इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं को स्थानीय खेल संस्कृति से जोड़ना, सामूहिक सहभागिता बढ़ाना और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना था।
कार्यक्रम का संचालन एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी कंचन कच्छप और जया जैक्लिन तिर्की के नेतृत्व में किया गया। अंत में कंचन कच्छप ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


