
Mumbai. रतन टाटा के करीबी रहे मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट से अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट से अपना इस्तीफा नोएल टाटा को भेजा है. उन्होंने अपने पत्र में काफी भावुक संदेश नोएल टाटा को रतन टाटा के नाम पर लिखा है. उन्होंने कहा है कि रतन टाटा से किए गए वादे के कारण वे टाटा समूह को किसी तरह के विवाद में घसीटना का नहीं चाहते हैं. इस कारण संस्था के हित और इस विवाद को विराम देने के लिए उन्होंने खुद को टाटा ट्रस्ट से अलग कर लिया है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि टाटा ट्रस्ट और टाटा समूह में आने वाले दिनों में सुशासन की स्थापना होगी और पारदर्शिता लाई जाएगी. उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि बिना आधार के किसी तरह का विवाद उत्पन्न हो.
क्या है पूरा मामला
मेहली मिस्त्री को 2022 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाया गया था. उनका तीन साल का टर्म 28 अक्टूबर 2025 को खत्म हुआ. 23 अक्टूबर को सर्कुलर भेजकर ट्रस्टीज से मेहली मिस्त्री की लाइफ ट्रस्टीशिप के लिए सहमति मांगी गई. लेकिन नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने इसका विरोध किया. इन तीनों के मेहली मिस्त्री के खिलाफ वोट से बहुमत बन गया. सर दोराबजी ट्रस्ट में प्रमित झवेरी और डेरियस खंबाटा ने उनका सपोर्ट किया, जबकि सर रतन ट्रस्ट में खंबाटा और जहांगीर जहांगीर ने भी हामी भरी थी. वहीं जिमी टाटा इस वोटिंग से दूर रहे थे।मेहली मिस्त्री शापूरजी पालोनजी ग्रुप से हैं, जो टाटा सन्स में 18% हिस्सा रखता है. 2016 में साइरस मिस्त्री को टाटा सन्स चेयरमैन पद से हटाया गया था. मेहली उस वक्त रतन टाटा के साथ खड़े रहे. वहीं नोएल टाटा की पत्नी आलू मिस्त्री मेहली की कजिन हैं. पारसी कम्युनिटी में इस फैसले से चर्चा है.

रतन टाटा की सौतेली बहनें शिरीन और डिएना जेजेभॉय ने इसे रिटेलिएटरी एक्शन बताया. टाटा ट्रस्ट्स की तरफ से अभी कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया. लेकिन सूत्रों के मुताबिक बोर्ड 11 नवंबर को मीटिंग करने वाला है. नोएल टाटा इस बोर्ड के चेयरमैन हैं. वहीं वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह वाइस चेयरमैन हैं.मेहली रतन टाटा की वसीयत के एग्जीक्यूटर भी हैं। सीनियर वकील एचपी रनिना ने कहा कि कैविएट से मेहली को नोटिस मिलेगा और कमिश्नर के सामने अपना पक्ष रख सकेंगे. ट्रस्ट्स भी अपना ओपिनियन दे सकेंगे.




