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Automobile Industry: वाहन उद्योग पर संकट; चीन ने रोकी दुर्लभ खनिज चुंबक की आपूर्ति, अब चीन जाने की तैयारी में भारतीय प्रतिनिधिमंडल

New Delhi. वाहन उद्योग का एक प्रतिनिधिमंडल दुर्लभ खनिज चुंबक के आयात में तेजी लाने के लिए चीन की यात्रा पर जाने की तैयारी में है. उद्योग से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी. एक सूत्र ने कहा, मूल उपकरण विनर्माताओं और वाहन के कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनियों के लगभग 40-50 अधिकारियों को वीजा की मंजूरी मिल गई है, लेकिन वे इस मामले पर बैठक के लिए अब भी चीनी वाणिज्य मंत्रालय से हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि चीन सरकार ने चार अप्रैल से दुर्लभ खनिजों और चुंबक के निर्यात को प्रतिबंधित श्रेणी के अंतर्गत रख दिया है. इससे घरेलू वाहन उद्योग को आपूर्ति में तेजी लाने के लिए कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
चीन ने सात दुर्लभ मृदा खनिजों और संबंधित चुंबक के लिए विशेष निर्यात लाइसेंस अनिवार्य कर दिए हैं. चीन का चुंबक की वैश्विक प्रसंस्करण क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक पर नियंत्रण है। इसका उपयोग वाहन, घरेलू उपकरणों और स्वच्छ ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है.

भारतीय वाहन उद्योग मंजूरी को लेकर चीजें स्पष्ट नहीं होने के कारण, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन के मुद्दों पर विचार कर रहा है. उद्योग सूत्रों ने कहा कि देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया दुर्लभ खनिज चुंबक की कमी के कारण अपने आगामी मॉडल ई-विटारा के उत्पादन को फिर से निर्धारित कर रही है. कंपनी सितंबर तक मॉडल की लगभग 8,000 इकाइयों का उत्पादन करना चाहती है, जबकि पहले इस अवधि के दौरान 26,000 से अधिक इकाइयों को लाने की योजना बनाई गई थी.

सूत्रों के अनुसार, हालांकि, कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में इस मॉडल की लगभग 67,000 इकाइयों के उत्पादन का लक्ष्य रखते हुए आगामी महीनों में उत्पादन में आई गिरावट की भरपाई करने की योजना बनाई है. घरेलू वाहन उद्योग ने चीन से दुर्लभ खनिज चुंबक के आयात के लिए मंजूरी में तेजी लाने में सरकार से भी सहायता मांगी है. महत्वपूर्ण खनिज में समैरियम, गैडोलीनियम, टेरबियम, डिस्प्रोसियम और ल्यूटेटियम शामिल हैं, जो इलेक्ट्रिक मोटर, ब्रेक प्रणाली, स्मार्टफोन और मिसाइल के लिए आवश्यक हैं.

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