
कोलकाता
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को रेलवे मंत्रालय की चार प्रमुख मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग ₹11,169 करोड़ आंकी गई है। इस स्वीकृति में दक्षिण पूर्व रेलवे की डांगोआपोसी–जरोली तीसरी और चौथी लाइन परियोजना भी शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत ₹1,752 करोड़ है।
यह परियोजना झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम और ओडिशा के क्योंझर ज़िले के लौह अयस्क समृद्ध क्षेत्रों को भारत की इस्पात उत्पादन इकाइयों से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह देश के 300 मिलियन टन वार्षिक इस्पात उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगी।
परियोजना का तकनीकी खाका इस प्रकार है:
मार्ग लंबाई: 43 किमी
कुल ट्रैक लंबाई: 108 किमी
स्टेशन: 7
बड़े पुल: 10, छोटे पुल: 196
रेल ओवर ब्रिज (ROB): 8
रेल अंडर ब्रिज (RUB): 4
रेल ओवर रेल ब्रिज: 2
इस परियोजना से पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों लाभ मिलेंगे। अनुमान के अनुसार प्रत्येक वर्ष 3.85 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी और 170 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी, जो पर्यावरणीय प्रभाव के लिहाज़ से लगभग 11 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। साथ ही 50 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी और ₹6,038 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत में भी बचत होगी।
इस परियोजना से न केवल सीधे रोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि यह क्षेत्रीय स्वरोजगार और आर्थिक विकास को भी गति देगी। यह परियोजना “पीएम-गति शक्ति” राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बहु-माध्यमीय कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अन्य स्वीकृत परियोजनाओं में शामिल हैं:
औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर)–परभणी दोहरीकरण (महाराष्ट्र)
अलीपुरद्वार रोड–न्यू जलपाईगुड़ी तीसरी और चौथी लाइन (पश्चिम बंगाल)
इटारसी–नागपुर चौथी लाइन (मध्यप्रदेश/महाराष्ट्र)
ये चारों परियोजनाएं देश के 13 जिलों को जोड़ते हुए भारतीय रेलवे नेटवर्क को 574 किमी तक विस्तार देंगी, जिससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही संभव होगी।
