


Patna. बिहार की राजधानी पटना में उस संवाददाता सम्मेलन के आयोजन स्थल पर एक पोस्टर पर ‘इंडिया’ गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं की तस्वीरें नहीं होने को लेकर बृहस्पतिवार को विवाद खड़ा हो गया, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव को विपक्षी गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस बैनर पर केवल राजद नेता तेजस्वी यादव की ही बड़ी तस्वीर दिख रही है. वहीं झारखंड से सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का लोगों भी गायब हो गया. महागठबंधन नेताओं की एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन का आयोजन पटना के मौर्या होटल में किया गया था. इसमें तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया.
विधानसभा चुनाव के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन ((इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कई दिनों तक चले गतिरोध के बाद ‘महागठबंधन’ के नेताओं ने अपनी पहली प्रेस वार्ता आयोजित की. इस संवाददाता सम्मेलन के आयोजन स्थल पर पोस्टर में कई प्रमुख नेताओं की तस्वीर नहीं होने से जुड़े विवाद पर भाजपा के राज्य मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “इंडिया गठबंधन के भीतर चल रही कलह अब खुलकर सामने आ गई है… पहले राहुल गांधी तेजस्वी को (गठबंधन का) चेहरा नहीं मानते थे. अब तेजस्वी ने राहुल गांधी को पोस्टरों से हटा दिया है. यह पोस्टर अपने आप में महागठबंधन के टूटने की घोषणा है. हालांकि, इस मुद्दे पर राजद की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच महागठबंधन और झामुमो के बीच दरार दिखी थी. इसी के साथ झामुमो ने खुद को बिहार विस चुनाव से पूरी तरह अलग कर लिया है. झामुमो ने इसके लिए राजद और कांग्रेस को जिम्मेवार ठहराया है. झामुमो ने 2015 के चुनाव में राजद को मदद की थी. राजद नै 2020 के चुनाव में झामुमो को तीन सीटें देने का वादा किया था, लेकिन नहीं दिया. 2024 के झारखंड विस चुनाव में झामुमो ने राजद, कांग्रेस और वाम दलों को शामिल कर गठबंधन धर्म का पालन किया, पर बिहार में झामुमो के साथ धोखा हुआ. बिहार विधानसभा चुनाव से झामुमो को अलग करने का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है. आने वाले दिनों में यहां कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है.



