


चाईबासा । Kolhan University के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप एवं प्लेसमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को अकादमिक ब्लॉक-सी, गैलरी-8 में “शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: सीखने, करियर एवं नवाचार का भविष्य” विषय पर एक महत्वपूर्ण आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
Mastercard के कंटेंट स्ट्रेटेजी मैनेजर विजय सिंह ने साझा किए AI के भविष्य से जुड़े अनुभव
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता Vijay Singh रहे, जो Mastercard में मैनेजर (कंटेंट स्ट्रेटेजी एंड डेवलपमेंट) के पद पर कार्यरत हैं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति Prof. (Dr.) Anjila Gupta मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर कुलसचिव सह निदेशक, IQAC डॉ. रंजीत कुमार कर्ण, मानविकी संकाय के डीन डॉ. तपन के. खन्नराह, सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन डॉ. परशुराम सियाल, विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
दीप प्रज्ज्वलन और सम्मान समारोह के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात मुख्य वक्ता विजय सिंह को शॉल और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण और अतिथि परिचय कुलसचिव सह निदेशक, IQAC डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार के क्षेत्र में विजय सिंह के योगदान पर प्रकाश डाला।
AI शिक्षा, शोध और रोजगार की दिशा बदल रहा है : विजय सिंह
अपने व्याख्यान में विजय सिंह ने शिक्षा, शोध, रोजगार और नवाचार के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की तेजी से बदलती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि AI न केवल शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को नई दिशा दे रहा है, बल्कि कार्यस्थल की बदलती आवश्यकताओं और भविष्य के करियर अवसरों को भी पुनर्परिभाषित कर रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से अपील की कि वे नई तकनीकों को जिम्मेदारी, नैतिकता और नवाचार की भावना के साथ अपनाएं तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल का विकास करें।
AI भविष्य की शिक्षा और अनुसंधान का मजबूत आधार बनेगा : कुलपति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का महत्वपूर्ण आधार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक रहते हुए उनका सकारात्मक और उत्तरदायी उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक व्याख्यान विश्वविद्यालय में ज्ञान-विस्तार, नवाचार और अंतर्विषयक शिक्षण को नई दिशा प्रदान करते हैं। साथ ही, उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
85 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, नवाचार और शोध को मिला नया दृष्टिकोण
कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नितीश कुमार महतो ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनीता कुमारी ने प्रस्तुत किया। इस व्याख्यान में विश्वविद्यालय के विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों के विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों सहित कुल 85 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नवीन ज्ञान, भविष्य की संभावनाओं और नवाचार के नए आयामों से परिचित कराया तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता और अंतर्विषयक शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।



