
Ranchi. झारखंड हाइकोर्ट में एक रिट याचिका दायर करके पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल के ‘ब्लड बैंक’ में पिछले साल अक्टूबर में ‘संक्रमित’ रक्त चढ़ाने से कथित तौर पर एचआईवी संक्रमित हुए पांच बच्चों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे का अनुरोध किया गया है। पांच से सात वर्ष आयु वर्ग के इन बच्चों की ओर से याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता मोहम्मद शादाब अंसारी ने बताया कि ये सभी बच्चे ‘थैलेसीमिया मेजर’ नामक आनुवंशिक रक्त विकार से पीड़ित हैं, जिसके कारण उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि ये बच्चे पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों के अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से आते हैं।
अंसारी ने कहा, ‘एचआईवी से संक्रमित बच्चों के परिवार कच्चे मकानों में रहते हैं और दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।’ उन्होंने बताया कि याचिका में प्रत्येक बच्चे के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे के साथ आजीवन मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा का अनुरोध किया गया है, जिसमें सुरक्षित जांच किया गया रक्त चढ़ाना, एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) दवाएं, नियमित सीडी4 काउंट और वायरल लोड की निगरानी तथा विशेष पोषण सहायता शामिल है। याचिका में बच्चों के परिवारों के लिए पक्का मकान, एक विशेष चिकित्सकीय बोर्ड के गठन और सामाजिक कलंक से निपटने के लिए परामर्श सहायता का भी अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, ‘‘सात वर्षीय एक बच्चे को ब्लड बैंक के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर पूर्व रंजिश के चलते संक्रमित रक्त चढ़ा दिया, जैसा कि परिवार की शिकायत में कहा गया है। बच्चे के दोनों माता-पिता की एचआईवी जांच रिपोर्ट निगेटिव आयी है।’’
राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक परिवार को दो लाख रुपये मुआवजा देने और कुछ अधिकारियों को निलंबित करने के फैसले का उल्लेख करते हुए याचिका में इसे ‘‘अत्यंत अपर्याप्त’’ बताया गया है और कहा गया है कि परिवारों को सामाजिक कलंक, आर्थिक कठिनाइयों और यहां तक कि बेदखली का सामना करना पड़ रहा है।
