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Chandil News :नारायण आईटीआई लुपुंगडीह चांडिल में धूमधाम से मनाई गई नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती

CHANDIL

नारायण आईटीआई लुपुंगडीह चांडिल में देश के महान स्वतंत्रता सेनानी एवं आज़ाद हिंद फ़ौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान परिसर में नेताजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे जी ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन देशभक्ति, त्याग और साहस की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने युवाओं से नेताजी के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

जटाशंकर पांडे जी ने उनके जीवनी उल्लेख करते हुए कहा कि कोलकाता के स्वतन्त्रता सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास के कार्य से प्रेरित होकर सुभाष दासबाबू के साथ काम करना चाहते थे। इंग्लैंड से उन्होंने दासबाबू को खत लिखकर उनके साथ काम करने की इच्छा प्रकट की। रवींद्रनाथ ठाकुर की सलाह के अनुसार भारत वापस आने पर वे सर्वप्रथम मुम्बई गये और महात्मा गांधी से मिले।
मुम्बई में गांधी मणिभवन में निवास करते थे। वहाँ 20 जुलाई 1921 को गाँधी और सुभाष के बीच पहली मुलाकात हुई।

गाँधी ने उन्हें कोलकाता जाकर दासबाबू के साथ काम करने की सलाह दी। इसके बाद सुभाष कोलकाता आकर दासबाबू से मिले।

उन दिनों गाँधी ने अंग्रेज़ सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन चला रखा था। दासबाबू इस आन्दोलन का बंगाल में नेतृत्व कर रहे थे। उनके साथ सुभाष इस आन्दोलन में सहभागी हो गये। गाँधी द्वारा 5 फरवरी 1922 को चौरी चौरा घटना के बाद असहयोग आंदोलन बंद कर दिया गया जिसके कारण 1922 में दासबाबू ने कांग्रेस के अन्तर्गत स्वराज पार्टी की स्थापना की।

विधानसभा के अन्दर से अंग्रेज़ सरकार का विरोध करने के लिये कोलकाता महापालिका का चुनाव स्वराज पार्टी ने लड़कर जीता और दासबाबू कोलकाता के महापौर(Mayor) बन गये। उन्होंने सुभाष को महापालिका का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी बनाया। सुभाष ने अपने कार्यकाल में कोलकाता महापालिका का पूरा ढाँचा और काम करने का तरीका ही बदल डाला।

कोलकाता में सभी रास्तों के अंग्रेज़ी नाम बदलकर उन्हें भारतीय नाम दिये गये।

डॉ. पांडे जी ने कहा कि “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” जैसे नारों से नेताजी ने पूरे देश में क्रांति की चेतना जगाई।
कार्यक्रम में शिक्षकों एवं छात्रों ने नेताजी के जीवन, संघर्ष और योगदान पर प्रकाश डाला। अंत में सभी ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से मौजूद रहे समाज सेवी राकेश वर्मा, प्रशांत पोद्दार,एडवोकेट निखिल कुमार, सुधीश कुमार,कोकन सिंह , प्रबीर सिंह,जयदीप पांडे , शांति राम महतो, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, शुभम साहू,भगत लाल तेली, पवन महतो संजीत महतो, गौरव महतो अजय मंडल,निमाई मंडल, सिसुमति दास आदि उपस्थित रहे

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