


जमशेदपुर.ऐतिहासिक अकाली घाट तोरण द्वार, जो वर्ष 1954 में अकाली नेता संता सिंह के नेतृत्व में निर्मित हुआ था, इन दिनों विवादों में आ गया है. पीढ़ी दर पीढ़ी इस द्वार की मरम्मत व देखरेख संता सिंह के वंशजों – पहले संतोख सिंह पटनी और उसके बाद हरकीरतन सिंह सोढ़ी – द्वारा की जाती रही है.
हाल ही में दूसरे समाज के कुछ लोगों द्वारा इस तोरण द्वार को तोड़ने की बात उठाई गई, जिस पर स्थानीय सिख समाज ने कड़ा विरोध जताया. विरोध बढ़ने पर सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) के प्रधान जसवंत सिंह सहित हीरा सिंह, संतोख सिंह, जगजीत सिंह, मनदीप सिंह, अमृतपाल सिंह, कुलविंदर सिंह पन्नू और हरदीप सिंह मौके पर पहुंचे और हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया.
कमेटी ने साफ कहा कि यह तोरण द्वार सिर्फ धार्मिक धरोहर नहीं, बल्कि समुदाय की ऐतिहासिक पहचान और भावनाओं से जुड़ा हुआ है. किसी भी कीमत पर इसकी तोड़फोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अकाली घाट तोरण द्वार न सिर्फ धार्मिक पहचान है, बल्कि यह सामूहिक विरासत और आपसी सौहार्द का प्रतीक भी है.



