
New Delhi. राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े विवाद के खिलाफ प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने केंद्रीय मंत्रियों से शुक्रवार को कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उसकी मांग को लेकर ‘‘कोई समझौता नहीं हो सकता। कॉजपा ने सरकार से 20 जुलाई को ‘‘बेरहमी से पीटे गए’’ प्रदर्शनकारी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
कॉजपा के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों जे. पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में तीन मई को हुई नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले’’ छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की भी मांग की गई।
कॉजपा के दो प्रतिनिधियों ने यहां विट्ठलभाई पटेल हाउस में केंद्रीय मंत्रियों जे. पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ करीब दो घंटे तक बैठक की, जिसका इसका मकसद नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अन्य अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों का कोई सौहार्दपूर्ण समाधान खोजना था।
नड्डा ने कहा कि मंत्रियों ने कॉजपा के प्रतिनिधियों की मांगें सुनीं और कहा कि सरकार इस संबंध में उन्हें बाद में जवाब देगी। उन्होंने कहा, हम शनिवार को फिर बैठक करेंगे। कॉजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने केंद्रीय मंत्रियों से स्पष्ट कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की हमारी मांग पर कोई समझौता नहीं हो सकता।’’
दास ने कहा कि कॉजपा ने आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियां वापस लेने की मांग भी की है।
बैठक में कॉजपा के अन्य प्रवक्ता आशुतोष रांका भी मौजूद थे।
सरकार को लिखे एक पत्र में कॉजपा ने अपना रुख स्पष्ट किया। पत्र में ‘‘दोनों पक्षों के लिए लाभकारी समाधान खोजने की सरकार की इच्छा’’ को स्वीकार किया गया और कहा गया, ‘‘पिछले कुछ दिनों में, हमने देश भर में समर्थकों और सदस्यों के साथ-साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से भी विस्तार से बातचीत की है। हम इस साफ नतीजे पर पहुंचे हैं कि हमारी मांगें – धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करना – ऐसी हैं जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता।’’
इसमें कहा गया, इसके अलावा, भारत सरकार, द्रुत कार्य बल के प्रमुख और दिल्ली पुलिस आयुक्त को उन छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, जिनकी उनके बलों ने बेरहमी से पिटाई की थी। संगठन ने यह भी कहा कि उनकी मांगों को जल्द से जल्द मान लिया जाए। संगठन ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और बड़ा हो जाएगा तथा पूरे देश में फैल जाएगा।
पत्र में कहा गया है, ‘‘इसके अलावा, हम परीक्षा सुधारों पर अपनी पांच-सूत्री मांगों के चार्टर पर सरकार की प्रतिक्रिया का स्वागत करेंगे। यह चार्टर शिक्षा प्रणाली में जरूरी बड़े संरचनात्मक सुधार लाने में अहम साबित होगा।’’
यह कॉजपा और सरकार के बीच तीसरी आधिकारिक बैठक थी। नड्डा ने 20 जुलाई को अपने आवास पर दास और रांका के साथ लगातार दो बैठकें कीं। उसी दिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने ‘संसद चलो’ के आह्वान पर संसद की ओर मार्च शुरू किया, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करके उन्हें पीछे धकेल दिया। इसमें कई लोग घायल हो गए।
शुक्रवार की यह बैठक जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अपनी मुख्य मांगों पर सरकार से मिले आश्वासन के बाद बृहस्पतिवार देर रात 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म करने के कुछ घंटों बाद हुई।
