


New Delhi. भारत और पाकिस्तान के सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत होने की घोषणा सबसे पहले अमेरिका की ओर से किए जाने के बाद कांग्रेस ने रविवार को सरकार से सवाल किया कि क्या उसने कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार कर ली है? पार्टी ने इस मुद्दे का “अंतरराष्ट्रीयकरण” करने के प्रयास की भी आलोचना की.
कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने यहां अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संघर्ष रोकने पर सहमति का ऐलान सभी के लिए आश्चर्यजनक है, क्योंकि यह पहली बार है, जब किसी तीसरे देश ने भारत और पाकिस्तान की तरफ से घोषणा की है. उन्होंने दोनों देशों को “एक साथ जोड़ने” के अमेरिका के प्रयास पर भी सवाल उठाया. पायलट ने कहा कि सरकार को मौजूदा हालात में इन मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक और सर्वदलीय बैठक तथा संसद का विशेष सत्र बुलाने की विपक्ष की मांग को स्वीकार करना चाहिए.
पिछले 24 घंटे में घटनाक्रम में तेजी से आए बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति के सोशल मीडिया के माध्यम से (भारत और पाकिस्तान के बीच) सैन्य संघर्ष रोकने पर सहमति बनाने की घोषणा किए जाने से हम सभी हैरान थे. पायलट ने कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच के मुद्दों का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का प्रयास किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को राष्ट्र और सभी पक्षों को विश्वास में लेते हुए स्पष्टीकरण देना चाहिए. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने शनिवार को घोषणा की कि भारत और पाकिस्तान जमीन, हवा और समुद्र में सभी प्रकार की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रोकने पर सहमत हो गए हैं.
पायलट ने सवाल किया, “किन शर्तों पर सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा की गई है और क्या गारंटी है कि ऐसी चीजें दोबारा नहीं होंगी, क्योंकि कल की घटनाओं (उल्लंघन) के बाद कोई विश्वसनीयता नहीं बची है. हम उन पर कैसे विश्वास कर सकते हैं और क्या गारंटी है कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी.



