


New Delhi. कांग्रेस ने भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका की ‘‘मध्यस्थता’’ को लेकर सोमवार को एक बार फिर सवाल खड़े किए और कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि क्या उसने द्विपक्षीय मामले में तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार कर लिया है? पार्टी महासचिव भूपेश बघेल ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सरकार एवं प्रशासन के स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग भी की तथा सवाल किया कि क्या गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा देंगे?उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे घटनाक्रम पर सर्वदलीय बैठक और संसद का विशेष सत्र बुलाकर स्थिति साफ करनी चाहिए तथा सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अवश्य शामिल होना चाहिए.
बघेल ने कहा, पहलगाम आतंकी हमले के बाद हमारी वीर सेना ने संकल्प और साहस के साथ दुश्मनों को जिस तरह से मुंहतोड़ जवाब दिया, वह पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का पल था. हमारे जवानों ने अनेक युद्धों में भारत की अखंडता की रक्षा की. 1971 के बाद इंदिरा गांधी ने दुनिया को दिखा दिया था कि भारत किसी के सामने झुकने वाला नहीं है.आज भी हमारी सेना उसी जज़्बे के साथ सीमा पर डटी हुई है. कांग्रेस पार्टी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है.उन्होंने कहा, ‘जब भी देश पर संकट आया, कांग्रेस पार्टी ने राजनीति को पीछे रखा और देशहित को प्रथम स्थान दिया. 1965 में लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा देकर देश को एक सूत्र में बांधा. 1971 में इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव को ठुकराकर पाकिस्तान को धूल चटा दी.बघेल ने कहा, आज भी हमारा वही संकल्प है.
आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में राजनीति नहीं, राष्ट्रवाद चाहिए। हमने उनसे सीखा है कि दुश्मन के साथ बातचीत की मेज पर बैठें तो कमजोरी नहीं, ताकत दिखाएं. उन्होंने कहा, इस संकट की घड़ी में कांग्रेस ने अपने राजनीतिक कार्यक्रम रद्द किए. ‘संविधान बचाओ रैली’ जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को स्थगित किया गया ताकि देश में एकजुटता का संदेश जाए. हमने ‘जय हिंद यात्रा’ निकाली ताकि सेना का मनोबल बढ़े और जनता आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट हो. हमने सरकार से कहा कि कितना भी बड़ा संकट आए, कांग्रेस आपके साथ है.
बघेल ने दावा किया कि लेकिन जब पूरा देश सेना के साथ खड़ा था तो भाजपा के नेता ट्विटर पर भाजपा और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की तुलना कर इसे राजनीतिक रंग दे रहे थे.
उन्होंने सवाल किया कि क्या सेना के बलिदान को चुनावी बयानबाजी में इस्तेमाल करना उचित है? बघेल ने यह भी कहा, अमेरिका के राष्ट्रपति ने अचानक संघर्षविराम की घोषणा की, क्या यह भारत सरकार की कूटनीतिक नाकामी नहीं है? क्या भारत ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को स्वीकार कर लिया है? क्या शिमला समझौता अब रद्द हो गया है? हमने संघर्षविराम में पाकिस्तान से क्या वादे लिए हैं, देश के लोगों को यह भी जानने का हक है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद के विशेष सत्र की मांग की है, जिसमें सभी दलों को बताया जाए कि युद्ध विराम की क्या शर्ते हैं.



