


Jamshedpur. दलमा के इलाके में मौजूद बाघ को अब पलामू टाइगर रिजर्व में वापस ले जाने की तैयारी है. इसके लिए PTR प्रबंधन ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) को प्रस्ताव भेजा है. इसकी मंजूरी मिलने के बाद बाघ को PTR में लाया जायेगा. दलमा के इलाके में मौजूद बाघ को tranquilize कर पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में लाया जायेगा. इस दौरान Wild Life Institute की एक टीम भी मौजूद रहेगी. ज्ञात हो कि पलामू टाइगर रिजर्व का एक बाघ पिछले कुछ महीनों से पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और झारखंड के दलमा के इलाके में अपना ठिकाना बनाये हुये है. बाघ की मॉनिटरिंग के लिए पलामू टाइगर रिजर्व की एक स्पेशल टीम भी दलमा के इलाके में कैंप कर रही है. बताया जाता है कि पलामू टाइगर रिजर्व से दलमा के बीच एक प्राकृतिक कॉरिडोर है, जिसके माध्यम से बाघ दलमा पहुंचा है.
इसलिए बाघ को ले जाने की तैयारी
दावा किया गया गया कि दलमा के इलाके में बाघों के लिए शिकार नहीं है. बाघ अपनी भूख को मिटाने के लिए मवेशियों का शिकार कर रहे हैं. हिरण, चीतल, नीलगाय, बायसन जैसे जंगली जीव कम है. बाघ ज्यादातर इन्हीं जानवरों को शिकार बनाता है. दलमा से सटा हुआ एक बड़ा इलाका शहरी आबादीवाला है. इस कारण बाघ पर खतरा मंडरा रहा है. दलमा का इलाका हाथियों के लिए चर्चित है, जबकि पलामू टाइगर रिजर्व बाघों के लिए सुरक्षित एरिया घोषित है. यह इलाका बाघों के लैंडस्केप कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है. पीटीआर से सतपुड़ा के जंगल तक बाघों का कॉरिडोर है.
कुछ दिनों पहले ओड़िशा से भी आया था बाघ
कुछ दिनों पहले ओड़िशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व ने झारखंड-ओडिशा बॉर्डर से एक बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया था. हालांकि बाद में बाघिन वापस उसी इलाके में लौट गयी थी. बाघ 400 से 500 किलोमीटर में अपने कॉरिडोर को विकसित करता है.
पलामू टाइगर रिजर्व में सात बाघ
पलामू टाइगर रिजर्व में सात बाघों के मौजूद रहने की पुष्टि हो चुकी है. पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन के द्वारा बाघों पर कड़ी निगरानी की जा रही है. जब पिछले कुछ दिनों से पीटीआर में एक बाघ की गतिविधि नजर नहीं आने लगी तब पदाधिकारियों में चिंता व्याप्त हो गयी थी, लेकिन दलमा में बाघ देखे जाने की पुष्टि होने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने उसका ट्रैकिंग किया. इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि वह बाघ पलामू टाइगर रिजर्व से आया है.



