
New Delhi. संसद की एक समिति ने झारखंड समेत कई राज्यों में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफटी) कोष को खनन प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए स्थानांतरित करने पर चिंता जताई है. समिति ने कहा है कि कि कई राज्यों में डीएमएफटी के ‘अन्यत्र’ इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं. डीएमएफटी खनन से संबंधित कार्यों से प्रभावित प्रत्येक भारतीय जिले के लिए एक गैर-लाभकारी सांविधिक ‘कोष’ है. यह प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) के साथ जुड़ा है. इसका उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की चुनौतियों का समाधान करना और उनके सतत विकास के लिए इसका प्रभावी और उचित उपयोग सुनिश्चित करना है.
कोयला, खान और इस्पात पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि कई राज्यों में डीएमएफ कोष को निर्धारित उद्देश्यों के अलावा अन्यत्र भी इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं. समिति ने कहा कि इस तरह के कोष को राज्य के खजाने/राज्य के समेकित कोष या राज्यस्तरीय कोष (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) या मुख्यमंत्री राहत कोष या अन्य कोषों और योजनाओं में स्थानांतरित किया गया है.
समिति ने कहा कि इस तरह के हस्तांतरण खनन अधिनियम की मूल भावना का उल्लंघन करता है. साथ ही यह जिस उद्देश्य से कोष बनाया गया है, उसे भी विफल करता है. समिति ने डीएमएफ से निर्धारित उद्देश्यों के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए धन के ऐसे अनधिकृत हस्तांतरण को रोकने के लिए खान मंत्रालय द्वारा जारी आदेशों का संज्ञान लेते हुए सख्त शब्दों में सुझाव दिया है कि उन्हें इस कोष के किसी भी अन्य इस्तेमाल से अवगत कराया जा सकता है.
समिति ने सुझाव दिया है कि इस तरह के हस्तांतरण को हतोत्साहित करने के लिए जुर्माना भी लगाया जा सकता हें देश के 23 राज्यों के 645 जिलों में जिला खनिज फाउंडेशन कोष स्थापित किए गए हैं. जनवरी, 2025 तक डीएमएफ के तहत एकत्रित कुल राशि 1,04,250.74 करोड़ रुपये थी और 88,483.24 करोड़ रुपये की कुल 3.69 लाख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी इनमें 55,923.65 करोड़ रुपये के खर्च से 2.08 लाख परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं.
