


New Delhi. टेलीविजन उद्योग पर बढ़ती लागत का दबाव गहराता जा रहा है, जिससे आने वाले समय में बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है। रैम की कीमतों में तेजी के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्लास्टिक और समुद्री ढुलाई की लागत भी बढ़ गई है। बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की पसंद पर भी दिखाई देने लगा है। कई ग्राहक अब बड़े परदे वाले टेलीविजन की बजाय छोटे आकार के मॉडल चुन रहे हैं। इसके अलावा रुपये में कमजोरी के कारण उत्पादन लागत बढ़ी है, जिससे खुदरा कीमतों में भी वृद्धि हुई है। बड़ी कंपनियों ने अभी तक पूरी लागत वृद्धि ग्राहकों पर नहीं डाली है और बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए कुछ बोझ स्वयं वहन कर रही हैं।
इसके बावजूद उपभोक्ता अपनी खरीद टाल रहे हैं। हालांकि उद्योग को उम्मीद है कि वर्ष के दूसरे हिस्से में त्योहारों के दौरान मांग में सुधार होगा। जो ग्राहक पहले 55 इंच का टेलीविजन लेने की सोच रहे थे, वे अब 50 इंच का मॉडल चुन रहे हैं, जबकि 65 इंच की जगह 55 इंच का विकल्प लिया जा रहा है। पिछले छह महीनों में कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में 32 इंच का साधारण टेलीविजन, जिसकी कीमत पहले करीब 9,000 रुपये थी, अब लगभग 11,000 रुपये में बिक रहा है।



