

Ghatsila. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व उनकी पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने घाटशिला के मऊभंडार ताम्र प्रतिभा मैदान में झामुमो प्रत्याशी सोमेश चंद्र सोरेन के समर्थन में शनिवार को जनसभा की. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन के साथ हेलीकॉप्टर से पहुंचे. यहां दोनों नेताओं का जोरदार स्वागत हुआ. सबसे पहले सीएम हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने मंच पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन और रामदास सोरेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. जनसभा को संबांधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्रदेश किसी ने भीख में नहीं दिया. हमने लड़ कर लिया. तब एक ही नारा था- कैसे लेंगे झारखंड, लड़कर लेंगे झारखंड. कितनी कुर्बानियों के बाद राज्य मिला. बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू और कई के नाम लेकर उन्होंने आंदोलन को याद किया.
सीएम ने कहा, राज्य बनने के बाद दुर्भाग्य से सत्ता आदिवासियों- मूलवासियों और दलितों के शोषकों के हाथ में चली गयी. सत्ता में बैठे कुछ लोगों ने आदिवासी व कमजोर वर्गों का शोषण किया. यह लड़ाई अभी जारी है. झारखण्ड के लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए महाजनों के बोझ तले दब जाने को मजबूर होते थे.


सीएम ने कहा, आज हम राज्य के घर परिवार को मजबूत बनाने के लिए, अपने राज्य की आधी आबादी को सशक्त करने के लिए, उनके खाते में ढाई-ढाई हजार रुपए दे रहे हैं. एक साल से हर महीना यह राशि दी जा रही है. जबकि भाजपा के लोगों ने कई राज्यों में यह झुनझुना दिखाया कि वो ढाई हजार, पांच हजार रुपए देंगे, मगर कहीं नहीं दिया. और तो और यह झूठा लोग, आदिवासी क्षेत्रों में अधिकार लूटने की तैयारी में रहते हैं. यहां के खनिज, कोयला, लोहा और तांबा, सभी पर इनका गिद्ध नजर रहता है. मगर दुर्भाग्य है इनका कि इस राज्य में अबुआ सरकार, झारखण्ड मुक्ति मोर्चां की सरकार की वजह से यह अपने मंसूबों पर कामयाब नहीं हो पा रहे हैं. इस राज्य को कब्जा करने के लिए इन्होंने तो हमको जेल में भी डाल दिया था. यह तो आप लोगों का आशीर्वाद था कि झूठे आरोपों में हमें अधिक देर यह रख नहीं पाए.

जानें कल्पना ने क्या कहा
मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन ने कहा कि सीएम हेमंत सोरेन को जेल इसलिए भेजा गया, क्योंकि उन्होंने गरीबों और बेटियों के लिए काम किया. सर्वजन पेंशन योजना और किशोरी समृद्धि योजना जैसी योजनाएं जनता के हित में हैं. इनसे झारखंड की बेटियां अपनी शिक्षा पूरी कर सकीं. झारखंड की जनता ने पहले भी जेल का ताला तोड़ा था, अब दोबारा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का समय है. उन्होंने जनता से अपील की 11 नवंबर को इवीएम में तीर-धनुष के निशान पर बटन दबाकर झारखंड की अस्मिता को मजबूत करें.



