


Ghatsila.घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार का काउंटडाउन शुरू हो गया है. चुनावी माहौल गर्म है, लेकिन आज यानी 9 नवंबर की शाम से प्रचार का शोर थम जाएगा. 11 नवंबर को जनता वोट डालेगी और 14 नवंबर को नतीजे बताएंगे कि बाजी किसके हाथ जाएगी? कुल 2 लाख 55 हज़ार मतदाता तय करेंगे कि झामुमो का झंडा लहराएगा या भाजपा का कमल खिलेगा. भले ही 13 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन असली जंग सोमेश सोरेन बनाम बाबूलाल सोरेन के बीच है. रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन घाटशिला उपचुनाव के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन द्वारा समर्थित झामुमो उम्मीदवार हैं. वहीं बाबूलाल सोरेन भाजपा के प्रत्याशी हैं.
भाजपा और झामुमो के नेताओं ने झोंकी ताकत
11 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले भाजपा और झामुमो ने अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी है. महागठबंधन से झामुमो प्रत्याशी दिवंगत रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन के पक्ष में चुनाव प्रचार की कमान झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संभाल रखी है. हेमंत और कल्पना सोरेन ने प्रचार की कमान संभाल रहे हैं.
पार्टी भावनात्मक जुड़ाव और महिला वोट बैंक पर दांव लगा रही है. वहीं, भाजपा ने भी पूरा दमखम झोंक दिया है. चुनाव प्रचार की कमान पांचों पूर्व मुख्यमंत्री ने संभाल रखी है. बाबूलाल मरांडी से लेकर रघुवर दास और अर्जुन मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन व पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा तक, सभी बड़े नेता मैदान में उतर चुके हैं. पार्टी को भरोसा है अपने बूथ प्रबंधन और संगठन की मज़बूती पर है. तीसरे मोर्चे के रूप में जेएलकेएम के जयराम महतो भी समीकरण बिगाड़ने की कोशिश में हैं.
चुनाव प्रचार में नहीं पहुंचे भाजपा के कई दिग्गज नेता
चुनाव प्रचार में कार्यकारी अध्यक्ष व सांसद आदित्य साहू, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, उप मुख्यमंत्री प्रवती पारिदा, पश्चिम बंगाल भाजपा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन के पक्ष में प्रचार करने मैदान में उतरे. हालांकि, चुनाव को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जुएल उरांव, बीरेंद्र सिंह खटीक और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नाम भी शामिल किया गया था, लेकिन ये अब तक चुनाव प्रचार के लिए नहीं आये हैं.



