
धनबाद। भारतीय रेलवे के कर्मचारियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते एक महिला यात्री को उसकी बच्ची की इलाज से जुड़ी महत्वपूर्ण चिकित्सीय सामग्री वापस मिल गई। रेलकर्मियों की इस मानवीय पहल ने न केवल महिला की चिंता दूर की, बल्कि रेलवे के प्रति उसका विश्वास भी और मजबूत कर दिया।
गलत ट्रेन में चढ़ने से हुई परेशानी
जानकारी के अनुसार, 04 जून 2026 को गाड़ी संख्या 11448 के चोपन स्टेशन से प्रस्थान के दौरान एक महिला यात्री ट्रेन के पीछे भागती हुई दिखाई दी। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात श्री उमेश कुमार सिंह, सीआईटी/सीपीयू ने महिला को सुरक्षित रूप से रोका और उससे परेशानी का कारण पूछा।
महिला ने बताया कि उसे रेणुकूट जाना था, लेकिन वह गलती से दूसरी ट्रेन में चढ़ गई थी। कुछ देर बाद जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह तुरंत ट्रेन से उतर गई। हालांकि, जल्दबाजी में उसकी बच्ची की महत्वपूर्ण सीटी स्कैन रिपोर्ट और आवश्यक दवाइयाँ ट्रेन के अंदर ही छूट गईं।
बच्ची के इलाज को लेकर थी चिंता
महिला ने बताया कि उसकी बच्ची का इलाज चल रहा है और सीटी स्कैन रिपोर्ट एवं दवाइयाँ इलाज के लिए बेहद जरूरी हैं। सामान छूट जाने के कारण वह काफी परेशान और भावुक हो गई। उसकी चिंता को देखते हुए रेलकर्मियों ने उसे सांत्वना दी और हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
रेलकर्मियों ने दिखाई तत्परता
महिला की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की गई। श्री उमेश कुमार सिंह ने चेकिंग स्टाफ श्री एस.पी. सिंह, सीआईटी/बरकाकाना से संपर्क स्थापित किया। दोनों अधिकारियों के समन्वय से ओबरा स्टेशन पर महिला की बच्ची की सीटी स्कैन रिपोर्ट और दवाइयाँ सुरक्षित रूप से बरामद कर ली गईं।
इसके बाद संबंधित सामग्री को आरपीएफ ओबरा के सुपुर्द किया गया ताकि उसे सुरक्षित रखा जा सके और महिला तक पहुंचाया जा सके।
सुरक्षित लौटाया गया सामान
रेलवे प्रशासन ने महिला की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा। महिला को ऑटो रिक्शा के माध्यम से ओबरा भेजा गया, जहां उसे उसकी बच्ची की महत्वपूर्ण मेडिकल रिपोर्ट और दवाइयाँ सुरक्षित रूप से सौंप दी गईं।
अपनी जरूरी चिकित्सीय सामग्री वापस मिलने के बाद महिला ने खुशी व्यक्त की और भारतीय रेल तथा संबंधित रेलकर्मियों का दिल से आभार जताया। उसने कहा कि रेलवे कर्मचारियों की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण उसकी बड़ी समस्या का समाधान हो सका।
रेलवे की मानवीय सेवा का उदाहरण
यह घटना दर्शाती है कि भारतीय रेलवे केवल यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने का कार्य ही नहीं करती, बल्कि जरूरत के समय मानवीय संवेदनाओं के साथ उनकी सहायता भी करती है। रेलकर्मियों की तत्परता और जिम्मेदारी ने एक बार फिर यात्रियों के बीच रेलवे की सकारात्मक छवि को मजबूत किया है।
