

रेल खबर।
भारतीय रेलवे के पं. दीनदयाल उपाध्याय मंडल (डीडीयू मंडल) में रेल संचालन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन के बघोई कुसा–जाखिम–रफीगंज रेलखंड पर 16 मार्च 2026 से ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) प्रणाली सफलतापूर्वक शुरू कर दी गई है।

18.7 किमी सेक्शन पर नई तकनीक लागू
इस परियोजना के तहत कुल 18.7 किलोमीटर लंबे रेलखंड को आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम से लैस किया गया है। यह सेक्शन ग्रैंड कॉर्ड रूट का अहम हिस्सा है, जहां ट्रेनों का आवागमन काफी व्यस्त रहता है। ABS प्रणाली लागू होने से अब ट्रेनों की मूवमेंट अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित होगी।
स्टेशनों पर किया गया तकनीकी उन्नयन
इस कार्य के अंतर्गत चार प्रमुख स्टेशनों—पुसौली, बघोई कुसा, जाखिम और रफीगंज—पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम में आवश्यक बदलाव किए गए। इससे सिग्नल और ट्रैक के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हुआ है, जिससे ट्रेनों के संचालन में मानवीय त्रुटि की संभावना कम हो जाती है।
समपार फाटक और ऑटो हट्स की कमीशनिंग
परियोजना के दौरान चार ऑटोमैटिक सिग्नल हट्स की भी स्थापना की गई है। इसके साथ ही समपार फाटक संख्या 20, 21, 22 और 24 को इंटरलॉक किया गया है। यह व्यवस्था फाटकों की सुरक्षा को और मजबूत बनाती है तथा ट्रेन आने पर स्वतः नियंत्रित संचालन सुनिश्चित करती है।
आधुनिक उपकरणों से लैस हुआ सेक्शन
इस रेलखंड पर कई अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनमें आईपीएस (इंटीग्रेटेड पावर सप्लाई), डेटा लॉगर, मेंटेनेंस-फ्री अर्थिंग, क्लास-ए लाइटनिंग प्रोटेक्शन सिस्टम, ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन एवं अलार्म सिस्टम और ईएलडी जैसे उपकरण शामिल हैं। ये सभी सिस्टम मिलकर रेल संचालन को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाते हैं।
सुरक्षा और गति में होगा सुधार
ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग के लागू होने से ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी स्वतः बनी रहती है। इससे एक ही ट्रैक पर अधिक ट्रेनों का संचालन संभव हो पाता है। साथ ही ट्रेनों की गति और समयपालन में भी सुधार देखने को मिलेगा।
113 रूट किमी पर पूरा हुआ ABS कार्य
इस नई कमीशनिंग के साथ डीडीयू मंडल में कुल 113 रूट किलोमीटर पर ABS प्रणाली लागू हो चुकी है। यह उपलब्धि मंडल को देश के आधुनिक रेल नेटवर्क की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



