
New Delhi. सुप्रीम कोर्ट ने संदिग्ध फर्जी बीमा दावों की जांच के लिए सभी राज्यों को विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा कि फर्जी बीमा दावे दाखिल किए जा रहे हैं और उन्हें मंजूर भी किया जा रहा है तथा इसमें एक निश्चित चलन नजर आ रहा है, जिसमें एक ही वाहन को कई दुर्घटनाओं में शामिल दिखाया जाता है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जो शुरुआत में कथित दुर्घटना में शामिल वाहन की पहचान से संबंधित था।
सुनवाई के दौरान बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के संकेत मिलने के बाद पीठ ने कार्यवाही का दायरा बढ़ाकर देशभर में फर्जी बीमा दावों की जांच तक कर दिया। पीठ ने अपने आदेश में कहा, अदालत यह उचित समझती है कि यह बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि धोखाधड़ी का संकेत देने वाले सभी दावों को एसआईटी के पास भेजा जाए और इसमें चुनिंदा मामलों को भेजने का तरीका न अपनाया जाए। पीठ ने कहा कि यदि यह पाया गया कि संबंधित बीमा कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने मामलों को चुनिंदा तरीके से राज्य की एसआईटी को भेजा है, तो उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे फर्जी दावों से न केवल बीमा कंपनियों पर वित्तीय दबाव पड़ता है, बल्कि अंततः वास्तविक उपभोक्ताओं को भी अधिक प्रीमियम का भुगतान करना पड़ सकता है। सभी राज्यों को समर्पित एसआईटी गठित करने का निर्देश देते हुए पीठ ने कहा कि बीमा कंपनियों से संदिग्ध फर्जी दावों के संबंध में प्राप्त सभी शिकायतें त्वरित जांच के लिए संबंधित राज्य की एसआईटी को भेजी जाएं।
पीठ ने राज्यों को इन जांच दलों के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मी उपलब्ध कराने और ऐसे मामलों की जांच के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का खुलासा करने का भी निर्देश दिया। पीठ ने बीमा कंपनियों को यह भी निर्देश दिया कि जहां एसआईटी की सिफारिश या प्राथमिकी से यह संकेत मिले कि उनके अधिकारी फर्जी दावों को सुगम बनाने में शामिल थे, वहां उनके खिलाफ बिना देरी विभागीय कार्रवाई की जाए। आदेश में बीमा कंपनियों को हलफनामे दाखिल कर एसआईटी को भेजे गए मामलों तथा उन अधिकारियों के खिलाफ की गई आंतरिक कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा गया है, जिन पर कंपनी के हितों के खिलाफ काम करने या धोखाधड़ी को बढ़ावा देने का संदेह है।
