
- 1 नर्स पर अधिकतम 5 मरीजों का दबाव होना चाहिए, लेकिन यह कई गुणा ज्यादा है
रांची. चिकित्सा क्षेत्र में डॉक्टर का जिस तरह से स्थान होता है उस तरह से ही नर्स का कार्य भी उपयोगिता रखता है. आज यानि 12 मई को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है. कोरोना काल में जिस तरह से डॉक्टर्स ने मरीज के लिए जी जान लगाई उस तरह ही नर्सों का हौंसला देश के लिए कमाल कर गया है. नर्स की भूमिका और उपयोगिता को बताने के लिए एक महान शख्यियत ने इस दिन को मनाने की शुरूआत.
जब कोई बीमार या घायल व्यक्ति किसी अस्पताल का दरवाजा खटखटाता है, तो सबसे पहले जो चेहरा उसे दिलासा देता है, वह नर्स का होता है. इंटरनेशनल नर्सेज डे सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उन हजारों-लाखों नर्सों की निस्वार्थ सेवा, धैर्य और संवेदना को सलाम करने का दिन है, जो हर परिस्थिति में मरीजों की सेवा में खड़ी रहती हैं.
डॉक्टर अगर जीवन बचाने की लड़ाई लड़ते हैं, तो नर्सें उस लड़ाई को अपने स्पर्श, देखभाल और मुस्कान से आसान बनाती हैं. नर्सिंग सिर्फ एक प्रोफेशन नहीं, बल्कि मानवता की सबसे ऊंची सेवा है. लेकिन कहीं न कहीं झारखंड के सरकारी अस्पतालों में हर नर्स के ऊपर काफी दवाब है. आईपीएचएस नॉर्म्स के तहत 500 बेड से अधिक के अस्पताल में 1 नर्स पर अधिकतम 5 मरीजों का दबाव होना चाहिए.
लेकिन झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज व अस्पताल रिम्स में ऐसा नही हैं. यहां एक-एक नर्सों पर 25 से 30 मरीजों का दबाव है. रिम्स में एक समय में करीब 2 हजार रोगी भर्ती रहते हैं. पर 2200 बेडेड इस अस्पताल में कुल स्टाफ नर्सों की संख्या मात्र 400 के करीब है. इनकी सेवा भी तीन शिफ्ट में ली जाती है, यानी एक शिफ्ट में 130 के करीब नर्सें ड्यूटी में रहती है. ऐसे में जरा सोचिए इन नर्सों पर कितना दबाव है. यह स्थिति दूसरे अस्पतालों में भी है.
इधर, नर्सों की कमी दूर करने के लिए रिम्स प्रबंधन की ओर से जेएसएससी को नर्सों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया है. जल्द ही जेएसएससी की ओर से 144 पदों में स्थाई नर्सों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा. रिम्स प्रबंधन का दावा है कि 144 नर्सों की नियुक्ति के बाद दूसरे लॉट में और 300 नर्सों के लिए विज्ञापन निकलवाया जाएगा. ताकि रिम्स में पेशेंट केयर पर नर्स और ज्यादा ध्यान दे सके.
