


जम्मू: दशकों से जिस क्षण का इंतजार था, वह आज (30 अप्रैल 2026) हकीकत में बदल गया है। पहली बार जम्मू को पैसेंजर ट्रेन के माध्यम से सीधे कश्मीर घाटी से जोड़ दिया गया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए श्रीनगर-श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा का विस्तार जम्मू तवी रेलवे स्टेशन तक कर दिया है। इस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस विस्तार के साथ ही, जम्मू इंटरचेंज के माध्यम से अब पूरा भारत कश्मीर घाटी से सीधे जुड़ गया है। यह सीधा रेल कॉरिडोर न केवल यात्रा को तेज और सुगम बनाएगा, बल्कि क्षेत्र के व्यापार, पर्यटन और अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी पूरी तरह से बदल देगा।
वंदे भारत की अपार सफलता: कोचों की संख्या 8 से बढ़कर 20 हुई
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ऐतिहासिक अवसर पर कहा कि पिछले वर्ष जून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जम्मू-श्रीनगर रेल लिंक के उद्घाटन के बाद से वंदे भारत एक्सप्रेस को यात्रियों का जबरदस्त रिस्पांस मिला है। इस ट्रेन की बढ़ती लोकप्रियता और यात्रियों की भारी मांग (फुल ऑक्युपेंसी) को देखते हुए, आज से जम्मू और श्रीनगर के बीच चलने वाली इस वंदे भारत एक्सप्रेस में कोचों की संख्या 8 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है। यह ट्रेन विशेष रूप से कश्मीर की दुर्गम परिस्थितियों और शून्य से नीचे के तापमान (Sub-zero temperature) में भी सुचारू रूप से चलने के लिए डिजाइन की गई है। इसके साथ ही, ट्रेन में यात्रियों को डोगरी व्यंजन परोसने की शुरुआत की गई है, ताकि यात्रा के दौरान वे स्थानीय संस्कृति का आनंद ले सकें।
कश्मीर के किसानों और अर्थव्यवस्था को मिला ‘रेलवे का बूस्टर डोज़’
सीधी रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा फायदा कश्मीर घाटी के व्यापार और किसानों को मिल रहा है। रेल मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक रेलवे के माध्यम से कश्मीर घाटी से देश के विभिन्न कोनों तक 2 करोड़ किलो सेब (20 हजार मीट्रिक टन) पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा, चेरी, प्रीमियम ड्राई फ्रूट्स, पश्मीना शॉल और कालीनों की ढुलाई में भी रेलवे अहम भूमिका निभा रहा है।
बाहर से मालगाड़ियों (रैक) की सीधी और सुगम आवाजाही शुरू होने से घाटी में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। रेल मंत्री ने बताया कि परिवहन लागत कम होने के कारण कश्मीर घाटी में सीमेंट की कीमतों में प्रति बोरी 50 रुपये तक की कमी आई है। इसके अतिरिक्त, रेलवे के माध्यम से अनाज (चावल), उर्वरक (खाद), औद्योगिक नमक और डेयरी उत्पादों (दूध) की निर्बाध आपूर्ति की जा रही है, जिसने सप्लाई चेन को बेहद मजबूत कर दिया है। ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़न ने भी दैनिक कार्गो आवाजाही शुरू कर दी है, जिससे लॉजिस्टिक्स 30 घंटे से भी कम समय में संभव हो गया है।
नई लाइनें और विस्तार: पुंछ-राजौरी और उरी तक पहुंचेगी ट्रेन
भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में रेल नेटवर्क का विस्तार युद्ध स्तर पर जारी है:
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जम्मू तवी स्टेशन का पुनर्विकास: बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए प्लेटफार्मों का विस्तार और सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
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मल्टीट्रैकिंग और डबलिंग: जालंधर-जम्मू सेक्शन का डबलिंग कार्य पूरा हो चुका है। काजीगुंड और बारामूला के बीच क्षमता बढ़ाने के लिए रेलवे लाइन के दोहरीकरण (Double Line) का काम तेजी से चल रहा है। वहीं, दिल्ली-अंबाला सेक्शन को चार लाइनों में अपग्रेड किया जा रहा है।
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नई रेल लाइनें (प्लानिंग स्टेज): क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने के लिए पुंछ और राजौरी जिलों को पहली बार राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इसके अलावा, रेल पहुंच को सीमा के और करीब ले जाने के लिए उरी-बारामूला विस्तार की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
चिनाब ब्रिज और अंजी खड्ड का निरीक्षण
इस अवसर पर रेल मंत्री ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना के तहत बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल ‘चिनाब रेल ब्रिज’ और ‘अंजी खड्ड ब्रिज’ का भी व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण किया। इन इंजीनियरिंग चमत्कारों के कारण ही इस कठिन हिमालयी क्षेत्र में हर मौसम (All-weather) में रेल कनेक्टिविटी संभव हो पाई है, जिससे सड़क परिवहन (जो अक्सर बर्फबारी और भूस्खलन से बाधित रहता है) पर निर्भरता कम होगी।




