
Jamshedpur.एक्सएलआरआई आडिटोरियम में रविवार को आदिवासी महादरबार का आयोजन किया गया. यह आयोजन आदिवासी सांवता सुशार अखाड़ा की ओर से हुआ, जिसमें झारखंड, बंगाल और ओडिशा से हजारों माझी बाबा और समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने हेमंत सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों की जमीन और अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पेसा अधिनियम लागू करने की इच्छा-शक्ति नहीं दिखा रही है. चम्पाई सोरेन ने टाटा समूह और हेमंत सरकार दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन बिना अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए कब्जाई जा रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वे सत्ता में थे तो पेसा अधिनियम की समीक्षा कर पारंपरिक ग्राम सभाओं को सशक्त करने का प्रयास किया गया था. लेकिन मौजूदा सरकार इसे लागू ही नहीं करना चाहती है. उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद आदिवासी समाज को “अबुआ-अबुआ” के नारे में उलझाकर सवाल पूछने से रोकना है.
चंपई सोरेन ने कहा कि बाबा तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और भगवान बिरसा मुंडा ने जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ी थी और अब आदिवासियों को भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाना होगा.
इस आदिवासी महा दरबार में पूर्व आईआरएस अधिकारी निशा उरांव, प्रो. ज्योतिंद्र बेसरा, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता सुभाशीष रशिक सोरेन, सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू समेत कई बुद्धिजीवियों ने विचार रखे.