
Jamshedpur. जमशेदपुर के डिमना क्षेत्र स्थित मिर्जाडीह के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया गया है. मिर्जाडीह बाँध विस्थापित एवं रैयत संघर्ष मोर्चा के बैनर तले इनके द्वारा कुल 21 गावं के ग्राम प्रधान, मुखिया सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने डिमना चौक से पारम्परिक हथियारों के साथ पैदल यात्रा करते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया है. विस्थापितों ने मंगलवार को डीसी ऑफिस के सामने अपनी मांगों को लेकर परंपरागत हथियारों के साथ प्रदर्शन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि डिमना डैम के कारण 21 गांव और टाटा शहर जिस भूमि पर बसा है, उसके 18 मौजा के मूल वासियों की आज तक अनदेखी हो रही है. इसलिए उनकी मांग है कि टाटा लीज नवीकरण से पूर्व उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए. उनके आरोपी का मुख्य निशाना टाटा स्टील है, क्योंकि उनका कहना है कि कंपनी की वजह से ही विस्थापितों को आज तक उनका मौलिक अधिकार नहीं मिला है.
परंपरागत हथियारों के साथ प्रदर्शन के दौरान ही सिटी एसपी भोजन के लिए डीसी ऑफिस के रास्ते जब बाहर निकले, तो प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन को घेर लिया और नारेबाजी करने लगे. साकची थाना प्रभारी और मजिस्ट्रेट ने प्रदर्शन को समझाने का काफी प्रयास किया, परंतु वे और उग्र होकर नारेबाजी करने लगे. इसके कारण सिटी एसपी को अपना वाहन वापस करना पड़ा. बाद में वे डीटीओ ऑफिस के सामने के बंद दरवाजे को खुलवाकर बाहर निकले.
प्रदर्शनकारीयों ने ये मांगें रखीं
इनके द्वारा पांच सूत्री मांग पत्र भी जिला उपायुक्त को सौंपा गया है. मुख्य रूप से मिर्जाडीह रैयतों के घर तोड़ने वाले दोषियों की गिरफ़्तारी, सभी गावों के सड़क निर्माण करवाये जाने, विस्थापितों को विस्थापन प्रमाण पत्र दिये जाने, टाटा लीज नविकरण कमिटी मे विस्थापित प्रतिनिधि को शामिल करने जैसे मांगे शामिल हैं. प्रदर्शनकारीयों ने कहा की राजकीय शोक के दौरान टाटा कंपनी एवं जिला प्रसाशन के मिली भगत से रैयतों के घर को तोड़ा गया, जिससे यह प्रतीत होता है की राज्य सरकार और जिला प्रसाशन टाटा कंपनी के इशारे पर चल रही है.
यहाँ मूलवासियो का लगातार दमन किया जा रहा है, लेकिन इनके साथ इंसाफ नहीं हो रहा है, ऐसे में अब सभी मूलनिवासी रैयत आंदोलन का रुक अपना चुके है और अगर 30 दिनों के भीतर इनके मांगो पर करवाई नहीं होती है तो आगे इनके द्वारा उग्र से उग्र आंदोलन किया जायेगा.