जमशेदपुर/आगरा। जमशेदपुर की रंगमंच संस्था गीता थिएटर ने उत्तर प्रदेश के आगरा में आयोजित रंगोदय 2026 की 22वीं अखिल भारतीय बहुभाषीय नाट्य प्रतियोगिता में अपनी प्रस्तुति से शहर के रंगकर्म को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई। प्रतियोगिता में 23 अक्टूबर को संस्था ने युवा रंगकर्मी प्रेम दीक्षित के निर्देशन में नाटक ‘म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर’ का मंचन किया।

इस अवसर पर निर्देशक प्रेम दीक्षित को रंगमंच और सामाजिक सरोकारों से जुड़े उनके योगदान के लिए संस्कार भारती नाट्य केन्द्र, आगरा की ओर से ‘स्वामी विवेकानंद सम्मान’ प्रदान किया गया।

सात स्त्रियों की कहानियों के जरिए समाज से सवाल
नाटक ‘म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर’ स्त्री के अस्तित्व, स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने लाता है।
इसकी कहानी एक काल्पनिक संग्रहालय के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जहां सात स्त्रियों के जीवन और संघर्ष को प्रदर्शित किया गया है। ये पात्र समाज की उन परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें महिलाओं की इच्छाओं, निर्णयों और स्वतंत्र पहचान को अक्सर पर्याप्त महत्व नहीं मिलता।
नाटक में संग्रहालय का प्रतीकात्मक प्रयोग करते हुए यह सवाल उठाया गया कि जिस समाज में स्त्री को देवी का दर्जा दिया जाता है, वहां उसे समान अधिकारों वाला स्वतंत्र मनुष्य मानने में बाधाएं क्यों मौजूद हैं।
प्रस्तुति के माध्यम से स्त्री की अस्मिता, सुरक्षा और मानवीय गरिमा के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया गया।
कलाकारों ने मंच पर जीवंत किए अलग-अलग किरदार
नाटक में जमशेदपुर के कलाकारों ने विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों से जुड़े पात्रों की भूमिकाएं निभाईं।
| कलाकार | भूमिका |
|---|---|
| देबू सिंह सरदार | सूत्रधार |
| तमन्ना राव | नेहा |
| ममता सिंह सरदार | कन्या |
| भूमिका पटेल | रिंकू पाटील |
| गीता कुमारी | शिरीन |
| गंगा मंडल | भंवरी देवी |
| श्रीष्टी साह | लवप्रीत कौर |
| गीता कुमारी | मुस्लिम महिला |
कलाकारों ने संवाद, भाव-भंगिमा और मंचीय अभिनय के माध्यम से अपने पात्रों के संघर्ष तथा संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया। विशेष रूप से स्त्री के सम्मान और समानता से जुड़े संदेश को प्रस्तुति का केंद्रीय विषय बनाया गया।
प्रेम दीक्षित को मिला ‘स्वामी विवेकानंद सम्मान’
गीता थिएटर के युवा निर्देशक प्रेम दीक्षित को रंगोदय 2026 के दौरान ‘स्वामी विवेकानंद सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
संस्कार भारती नाट्य केन्द्र, आगरा की ओर से प्रदान किए गए इस सम्मान को जमशेदपुर के रंगमंच के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रेम दीक्षित अपने नाट्य निर्देशन के माध्यम से सामाजिक मुद्दों और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर प्रस्तुत करने के लिए सक्रिय हैं। ‘म्यूजियम ऑफ स्पीशीज इन डेंजर’ भी इसी दिशा में उनका एक प्रयास है।
मनोरंजन के साथ सामाजिक चेतना का संदेश
गीता थिएटर की प्रस्तुति ने रंगमंच को केवल मनोरंजन तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक संवाद का माध्यम बनाने पर जोर दिया।
नाटक के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि समाज की वास्तविक प्रगति महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और निर्णय लेने की स्वतंत्रता प्रदान करने से जुड़ी है।
आगरा में आयोजित इस राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता में जमशेदपुर के कलाकारों की भागीदारी और निर्देशक प्रेम दीक्षित को मिला सम्मान स्थानीय रंगमंच के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है।


