मानगो में पेयजल संकट पर सरयू राय ने अपनाया कड़ा रुख
बोले सरयू………..
-10 मिनट पानी देकर थमा दिया जाता है महीना भर का बिल
-मानगो के दर्जनों इलाकों में पेयजल के लिए मचा है हाहाकार
-टैंकर भी नाकाफी, लोगों के कमर में दर्द, समीक्षा करें उपायुक्त
– परियोजना पर 100 करोड़ से ज्यादा हो गए खर्च, लोगों को नहीं मिलता पानी
-यही हालात बरकरार रहे तो मानगो पेयजल परियोजना हो जाएगी ध्वस्त
जमशेदपुर। मानगो क्षेत्र में गहराते पेयजल संकट को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने अब आर-पार की चेतावनी दी है। उन्होंने प्रशासन और मानगो नगर निगम को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि इस अवधि में पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो 16वें दिन से ‘पानी नहीं तो बिल नहीं’ अभियान शुरू किया जाएगा। विधायक ने स्पष्ट कहा कि जिन घरों में नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां पानी के नाम पर भेजे जा रहे बिल का भुगतान जनता क्यों करे?
सरयू राय ने कहा कि मानगो के लगभग सभी क्षेत्रों में पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। उन्हें प्रतिदिन दर्जनों फोन आ रहे हैं और अधिकांश शिकायतें पानी को लेकर ही होती हैं। कहीं पांच मिनट तो कहीं दस मिनट पानी आता है और उसके बाद आपूर्ति बंद हो जाती है। लोगों को मजबूर होकर दूर-दराज से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। कई स्थानों पर टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है, लेकिन वह नाकाफी है।
श्री राय ने बताया कि उन्होंने शनिवार को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से इस संबंध में बात की। उपायुक्त ने श्री राय को बताया कि उनके कार्यालय में पेयजल संकट को लेकर लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं। इस पर सरयू राय ने उन्हें सुझाव दिया कि मानगो नगर निगम, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा मानगो पेयजल परियोजना का संचालन करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों को एक साथ बैठाकर समीक्षा की जाए कि आखिर पेयजल आपूर्ति में लगातार परेशानी क्यों बनी हुई है।
सरयू राय ने उपायुक्त को बताया कि गत शुक्रवार को उन्होंने डिमना रोड और उलीडीह के लगभग दर्जनभर इलाकों का दौरा किया। उनका अंतिम दौरा रात करीब साढ़े आठ बजे उलीडीह के एक आदिवासी क्षेत्र में हुआ। लगभग हर जगह लोगों ने एक ही शिकायत थीः पानी नहीं आता और आता भी है तो महज पांच-दस मिनट के लिए। लोगों ने उन्हें बताया कि पानी के लिए उन्हें घंटों मशक्कत करनी पड़ती है। पानी ढोकर लाने के कारण लोगों के बांह और कंधों में दर्द हो रहा है। कभी-कभार टैंकर आता है, लेकिन उससे भी पूरे परिवार की जरूरत पूरी नहीं होती। लोगों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पानी मिल नहीं रहा तो पानी का बिल किस आधार पर भेजा जा रहा है? कितने घरों में वास्तव में मीटर लगे हैं और कितने घरों को निश्चित राशि का बिल भेजा जा रहा है, इसकी भी जांच होनी चाहिए। लोग आक्रोशित थे और उन्होंने पानी नहीं तो बिल नहीं के नारे लगाए। श्री राय ने इस मांग को अभियान का स्वरूप देने की घोषणा की है।
सरयू राय ने कहा कि उन्होंने उपायुक्त और मानगो नगर निगम के अपर आयुक्त को स्पष्ट कर दिया है कि अब पानी नहीं तो बिल नहीं अभियान चलेगा। नगर निगम और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों को मोहल्लावार यह पता करना चाहिए कि कहां पानी नहीं पहुंच रहा है और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है। केवल लोगों को जिम्मेदारी सौंप देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। संबंधित अधिकारियों से यह रिपोर्ट मांगी जानी चाहिए कि जलापूर्ति बाधित क्यों है और उसे दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।
सरयू राय ने मानगो पेयजल परियोजना के फेज-2 को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस फेज-1 पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, उसी में गंभीर संकट बना हुआ है। ऐसे में फेज-2 पर आगे बढ़ने से पहले फेज-1 की खामियों को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि निगम के अफसरों ने मेयर से नारियल तो फोड़वा लिया कि अब जयपाल कॉलोनी के भीतर से पाइपलाइन ले जाकर बालीगुमा पानी की टंकी तक पानी पहुंचा दिया जाएगा लेकिन जिस रास्ते से पाइपलाइन ले जानी थी, वह कृषि विभाग की जमीन है और अब तक वहां से एनओसी नहीं मिली है। इस कारण करीब एक महीने से काम रुका हुआ है। बिना आवश्यक अनुमति और तैयारी के काम शुरू करना हड़बड़ी का परिणाम है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि परियोजना का संचालन इसी तरह चलता रहा तो इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद परियोजना के ठप पड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
सरयू राय ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र की जनता से 15 दिन इंतजार करने को कहा है। इस अवधि में यदि पेयजल व्यवस्था में सुधार होता है तो अच्छी बात है, लेकिन यदि स्थिति जस की तस रहती है तो 16वें दिन से ‘पानी नहीं तो बिल नहीं’ अभियान शुरू किया जाएगा।
