



जमशेदपुर:
समाजसेवी एवं कृष्ण मुरारी चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक कृष्ण मुरारी गुप्ता के 76वें जन्मदिन के अवसर पर शनिवार को राम मनोहर लोहिया नेत्रालय, बागबेड़ा थाना चौक में निःशुल्क नेत्र जांच एवं मोतियाबिंद पहचान शिविर का आयोजन किया गया। यह 818वां नेत्र शिविर भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, पूर्वी सिंहभूम, राम मनोहर लोहिया नेत्रालय, द्रोपदी देवी चिमनलाल भालोटिया फैमिली ट्रस्ट, राजस्थान सेवा सदन तथा जिला ग्रामीण स्वास्थ्य समिति के संयुक्त सहयोग से आयोजित हुआ।शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों ने पहुंचकर अपनी आंखों की जांच कराई और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लिया।
67 मरीजों की हुई जांच, 32 मोतियाबिंद रोगियों का ऑपरेशन होगा
शिविर के दौरान नेत्र विशेषज्ञ डॉ. बी. पी. सिंह एवं उनकी चिकित्सकीय टीम ने कुल 67 मरीजों की आंखों की जांच की। जांच के बाद 32 मरीजों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई, जिन्हें ऑपरेशन एवं लेंस प्रत्यारोपण के लिए चयनित किया गया।रविवार को इन सभी मरीजों का ऑपरेशन एवं लेंस प्रत्यारोपण अनुभवी नेत्र चिकित्सकों की टीम द्वारा किया जाएगा।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम करेगी ऑपरेशन
नेत्र रोगियों का ऑपरेशन डॉ. बी. पी. सिंह, डॉ. भारती शर्मा, डॉ. पूनम सिंह, डॉ. विवेक केडिया तथा उनकी सहयोगी चिकित्सकीय टीम द्वारा किया जाएगा। ऑपरेशन के बाद मरीजों को आवश्यक दवाएं और चिकित्सकीय परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।
समाजसेवियों और रेड क्रॉस पदाधिकारियों की रही मौजूदगी
शिविर के दौरान कृष्ण मुरारी गुप्ता, समाजसेवी गणेश राव, प्रशांत कुमार गुप्ता, भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, पूर्वी सिंहभूम के मानद सचिव विजय कुमार सिंह तथा सक्रिय कार्यकर्ता राकेश मिश्र उपस्थित रहे। सभी ने मरीजों का हालचाल जाना और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यकर्ताओं ने निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
शिविर के सफल आयोजन में राजू बिंद, राधेश्याम कुमार, अशोक घोषाल, प्रकाशभानु महतो, आशीष कुमार और श्याम कुमार प्रसाद सहित कई स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन समिति ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
आयोजकों ने कहा कि ऐसे स्वास्थ्य शिविर समाज के जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। समय पर जांच और उपचार से मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का सफल इलाज संभव है। इस प्रकार के शिविर भविष्य में भी लगातार आयोजित किए जाएंगे।


