
जमशेदपुर ।
नगर इकाई के ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (AIDSO) द्वारा 9 जून 2026 को उलगुलान के महानायक शहीद बिरसा मुंडा का शहादत दिवस पूरी मर्यादा और श्रद्धा के साथ मनाया गया। भुइयाडीह गोलचक्कर स्थित बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थल पर एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत एआईडीएसओ के प्रदेश सचिव सोहन महतो द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इसके पश्चात वहां उपस्थित सभी लोगों ने ‘धरती आबा’ की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को नमन किया।
उलगुलान और बिरसा मुंडा का ऐतिहासिक संघर्ष
इस अवसर पर एआईडीएसओ के प्रदेश कोषाध्यक्ष युधिष्ठिर कुमार ने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि संगठन आज पूरे देशभर में शहीद बिरसा मुंडा का शहादत दिवस मना रहा है और उनके दिखाए क्रांतिकारी मार्ग पर चलने का संकल्प ले रहा है।
उन्होंने याद दिलाया कि बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद, जमींदारी शोषण और आदिवासी जनता पर हो रहे क्रूर अत्याचारों के विरुद्ध एक ऐतिहासिक जन आंदोलन का नेतृत्व किया था। उनके द्वारा किया गया ‘उलगुलान’ (महाविद्रोह) भारतीय स्वतंत्रता और जन आंदोलन के इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ सामाजिक न्याय के लिए उनका यह संघर्ष आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है।
पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रखी जा रही झारखंड की जमीन
कार्यक्रम के दौरान वर्तमान व्यवस्था और नीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह राज्य का दुर्भाग्य है कि जिस महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए भगवान बिरसा मुंडा ने अपनी शहादत दी थी, वह उद्देश्य आज भी अधूरा है।
जिस कानून की बदौलत झारखंड की धरती अब तक बची हुई थी, आज उसी धरती को पूंजीपतियों के हाथों में गिरवी रखा जा रहा है। सरकारों पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा गया कि आदिवासियों और मूलवासियों को लगातार ठगा जा रहा है। उनके जल, जंगल और जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिशें बदस्तूर जारी हैं।
झारखंड को धूल और राख बनने से बचाने की अपील
संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि भगवान बिरसा मुंडा का सपना आज भी अधूरा है। इस अधूरे सपने को मिलकर पूरा करने का दायित्व समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं को लेना होगा। यदि समय रहते लोग जागरूक नहीं हुए और अपनी प्राकृतिक संपदा की रक्षा नहीं की गई, तो आने वाले समय में झारखंड अपने अमूल्य खनिज संसाधनों के लिए नहीं, बल्कि केवल धूल, राख और अवशेष के रूप में जाना जाएगा। कार्यक्रम का समापन बिरसा मुंडा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और संघर्ष जारी रखने के मजबूत संकल्प के साथ हुआ।
