
सरायकेला:
सरायकेला से भाजपा विधायक चंपई सोरेन ने एक बार फिर हेमंत सोरेन सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार को महूलडीह स्थित अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने संथाल परगना क्षेत्र, खासकर भोगनाडीह में आदिवासी आयोजनों को जानबूझकर दबाने का आरोप लगाया।
हूल विद्रोह की भूमि फिर गुलामी की ओर?
चंपई सोरेन ने कहा कि आज से करीब 170 साल पहले वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने अंग्रेजों के खिलाफ हूल विद्रोह किया था। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि आजादी के बाद भी उनकी पवित्र भूमि भोगनाडीह में उनके वंशजों को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि हर कदम पर पुलिस-प्रशासन का पहरा है और मनमाने आदेश थोपे जा रहे हैं।
मंडल मुर्मू और हूल दिवस विवाद
चंपई सोरेन ने बताया कि वीर सिदो-कान्हू के वंशज श्री मंडल मुर्मू ने जून 2025 में “वीर सिदो कान्हू हूल फाउंडेशन” के तहत हूल दिवस पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन जिला प्रशासन ने एक महीने तक आवेदन लटकाने के बाद अनुमति देने से इनकार कर दिया। प्रशासन ने सरकारी कार्यक्रम का हवाला दिया, जबकि इससे पहले उसी क्षेत्र में विभिन्न राजनीतिक और गैर-राजनीतिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से होते रहे हैं।
पंडाल तोड़ने और लाठीचार्ज का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामसभा की अनुमति के बावजूद आधी रात को पुलिस ने पंडाल तोड़ दिया। हूल दिवस के दिन वंशजों द्वारा पूजा के लिए पार्क बंद रखने पर प्रशासन ने ताला तोड़ दिया, जिसके बाद विवाद बढ़ा और बिना चेतावनी लाठीचार्ज व आंसू गैस का प्रयोग किया गया। इसके बाद सारा दोष ग्रामीणों और शहीद परिवारों पर मढ़ते हुए कई लोगों को जेल भेज दिया गया।
संथाल परगना स्थापना दिवस पर भी रोक?
चंपई सोरेन ने कहा कि हर साल 22 दिसंबर को भोगनाडीह में “संथाल परगना स्थापना दिवस” मनाया जाता है, लेकिन इस बार उन्हें मुख्य अतिथि बनाए जाने के बाद प्रशासन ने दर्जनों मजिस्ट्रेट तैनात कर कड़ी शर्तें लगा दीं। उन्होंने सवाल उठाया कि फुटबॉल जैसे खेल आयोजनों में इतने मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की क्या जरूरत है।
अघोषित प्रतिबंध का आरोप
उन्होंने दावा किया कि झारखंड और राज्य से बाहर कई कार्यक्रमों में शामिल होने पर कोई समस्या नहीं होती, लेकिन साहिबगंज जिले में उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है। चंपई सोरेन ने इसे उनके खिलाफ अघोषित प्रतिबंध करार दिया और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
खुली चुनौती
अंत में चंपई सोरेन ने कहा कि 30 जून को हूल दिवस के अवसर पर झारखंड, बंगाल, बिहार और ओडिशा से लाखों आदिवासी भोगनाडीह पहुंचेंगे। उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार में ताकत है तो उन्हें रोककर दिखाए।
