
जमशेदपुर। कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. अशोक झा (अविचल) को हाल ही में दो अत्यंत प्रतिष्ठित और जिम्मेदार पदों पर नियुक्त किया गया है। उन्हें विश्वविद्यालय का प्रवक्ता सह मीडिया सेल कोऑर्डिनेटर बनाया गया है, साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में मैथिली भाषा के नोडल ऑफिसर के रूप में भी पदस्थापित किया गया है।
यह नियुक्ति न केवल उनके शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव का सम्मान है, बल्कि मैथिली भाषा और संस्कृति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी मानी जा रही है। उनकी इस दोहरी भूमिका से न केवल विश्वविद्यालय को लाभ होगा, बल्कि भारतीय भाषाओं में से एक मैथिली को भी शैक्षणिक और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
READ MORE :Jamshedpur: विधायक सरयू राय ने पेंशन योजना के तहत लोगों के बीच 113 प्रमाण पत्रों का किया वितरण
कोल्हान मिथिला समाज ने किया भव्य सम्मान
डॉ. झा की इस विशिष्ट उपलब्धि पर कोल्हान मिथिला समाज ने अपने प्रबुद्ध सदस्यों के साथ एक सम्मान समारोह आयोजित किया। समारोह के दौरान उन्हें मिथिला की पारंपरिक विधि से शॉल ओढ़ाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। समाज ने इसे मिथिला समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
READ MORE :TataNagar Station: बारिश के दौरान हावड़ा, बिहार समेत अन्य रुट की ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री परेशान
उपस्थित रहे समाज के प्रमुख सदस्य
इस सम्मान समारोह में कई प्रतिष्ठित सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से – पं. विपिन झा, आकाश चंद्र मिश्र, पंकज राय, अनिल झा, रंजीत झा, शिव चंद्र झा, शिव कुमार झा (टिल्लु), अमर झा, चंदन झा, गोपालजी चौधरी, संजीव झा, नवीन कुंवर, देवेन्द्र झा, विवेकानंद झा, मिथिलेश झा सहित अन्य कई गणमान्यजन उपस्थित थे।
READ MORE :Jamshedpur News :अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन द्वारा रक्तदान शिविर, 340 यूनिट रक्त संग्रहित
भाषा और शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल की उम्मीद
डॉ. झा ने अपने संबोधन में कहा कि वे मैथिली भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध हैं और विश्वविद्यालय स्तर पर भाषा, संस्कृति और संचार के क्षेत्र में नई पहल की शुरुआत करेंगे। उन्होंने कोल्हान मिथिला समाज और विश्वविद्यालय परिवार को उनके निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद भी दिया।
उनकी यह नियुक्ति भावी शिक्षकों, शोधकर्ताओं और भाषाविदों के लिए एक प्रेरणा है और यह भी संदेश देती है कि भारतीय भाषाओं को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना अब एक सामूहिक प्रयास बन चुका है।
