
जमशेदपुर
हिंदी-उर्दू साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर, करीम सिटी कॉलेज, साकची के उर्दू स्नातकोत्तर विभाग में एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्रों और शिक्षकों ने प्रेमचंद की साहित्यिक धरोहर को याद करते हुए उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. शाहबाज अंसारी ने की। उन्होंने अपने वक्तव्य में प्रेमचंद को उर्दू-हिंदी कथा साहित्य का स्तंभ बताते हुए कहा कि उनकी लेखनी ने समाज के हर वर्ग को झकझोरा और ग्रामीण जीवन को साहित्य में सम्मानजनक स्थान दिलाया।
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कार्यक्रम में तीन छात्राओं — आयशा फिरदौस, सदफ अत्तारिया और सूफियाना — ने अपने विचार व्यक्त किए। इन छात्राओं ने क्रमशः प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियाँ “बड़े घर की बेटी”, “पूस की रात” और “कफन” के माध्यम से प्रेमचंद की लेखन शैली, यथार्थ चित्रण, सामाजिक चेतना और करुणा को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि उर्दू में प्रेमचंद ने अफसाना निगारी (कहानी लेखन) की नींव रखी और उसमें उत्कृष्टता की ऊँचाइयों को छुआ।
छात्राओं ने कहा कि प्रेमचंद ने न केवल ग्रामीण भारत की समस्याओं को स्वर दिया बल्कि समाज के उपेक्षित वर्ग की पीड़ा को भी प्रमुखता से उजागर किया। उनकी कहानियों ने साहित्य को जनजीवन से जोड़ा और पाठकों को सोचने पर मजबूर किया।
प्रो. मोहम्मद ईसा और डॉ. सादिक इकबाल ने छात्राओं के विचारों की समीक्षा प्रस्तुत की और कहा कि प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने समय में थीं।
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कार्यक्रम का संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन उर्दू विभाग के शिक्षक जीशान सफी ने किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए धन्यवाद दिया और प्रेमचंद की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
