



जमशेदपुर,: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर की आउटरीच एक्टिविटीज़ यूनिट की ओर से तिरंगा अंगीकरण दिवस के अवसर पर डायमंड जुबली लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स (DJLHC) में एक विशिष्ट व्याख्यान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान, संवैधानिक मूल्यों, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सुदृढ़ करना था।
राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन और सम्मान समारोह से हुआ। मुख्य अतिथि तीर्थंकर दास, संयुक्त सचिव, लोकसभा सचिवालय, नई दिल्ली तथा विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय, मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रमुख, टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट डायरेक्टोरेट, सीएसआईआर नई दिल्ली उपस्थित रहे।
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
युवाओं को नवाचार और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश
मुख्य अतिथि तीर्थंकर दास ने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं को संविधान के आदर्शों का पालन करते हुए जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव हैं।
कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। डॉ. इंद्राणी सूत्रधार ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. विशेष रंजन कर और डॉ. शंकर राय की प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी यादगार बना दिया।
IPR, स्टार्टअप और उद्योग आधारित अनुसंधान पर विशेष व्याख्यान
उद्घाटन सत्र के बाद डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय ने “बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), उद्यमिता एवं मिशन-उन्मुख नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए IPR, नवाचार और उद्यमिता के बीच मजबूत तालमेल आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिज़ाइन जैसे बौद्धिक संपदा अधिकार शोध को व्यावसायिक सफलता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, सर्कुलर इकोनॉमी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
शोध को पेटेंट और स्टार्टअप में बदलने की अपील
डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय ने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से अपने नवाचारों को केवल शोध-पत्रों तक सीमित न रखने, बल्कि उन्हें पेटेंट, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्टार्टअप के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यही मॉडल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
व्याख्यान के बाद आयोजित संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने IPR, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और अनुसंधान के व्यावसायीकरण से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. प्रभा चंद के नेतृत्व में हुआ। आयोजन समिति में डॉ. सितेंदु मंडल, डॉ. अनंत कुमार आट्टा और डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय सहित कई प्राध्यापकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस आयोजन ने एनआईटी जमशेदपुर की नवाचार, उद्यमिता, बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में अपनी पहचान बनाई।



