
Jamshedpur. झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर की एक महिला के साथ कथित तौर पर संपत्ति हड़पने और उसे जबरन मानसिक रोगी घोषित कर संस्थानों में भर्ती कराने के मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने गंभीर आरोपों के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर सवाल उठाते हुए जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडेय को वर्चुअल रूप से तलब कर स्पष्टीकरण मांगा।
खंडपीठ के समक्ष दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसका एनआरआई भाई, जो ऑस्ट्रेलिया में रहता है, पैतृक संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से उसे फर्जी तरीके से मानसिक रोगी घोषित करवा दिया। पीड़िता के अनुसार, भाई ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर दादा की संपत्ति का गिफ्ट डीड अपने नाम करवा लिया और बाद में उसे बेच भी दिया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि विरोध करने पर आरोपी भाई ने उसे जबरन रांची स्थित कांके के डेविस इंस्टीट्यूट और रिम्स (रिनपास) में भर्ती करा दिया। वर्तमान में पीड़िता कदमा क्षेत्र में अपने बीमार माता-पिता के साथ किराए के मकान में रह रही है और आर्थिक तंगी के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने विदेश मंत्रालय के सचिव को भी प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है, ताकि विदेश में रह रहे आरोपी का पता लगाया जा सके और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
अदालत ने एसएसपी को पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस प्रशासन की होगी।
कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले दोनों पक्षों के बीच सुलह की संभावनाएं तलाशने का भी निर्देश दिया है। पीड़िता की ओर से अधिवक्ता खुशबू कुमारी और शैलेश कुमार ने पक्ष रखा।
