

Jamshedpur. जमशेदपुर प्रखंड विकास कार्यालय में आज माझी परगना महाल पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के बैनर तले आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। धाड़ दिशोम देश पारानिक बाबा दुर्गा चरण मुर्मू के नेतृत्व में एकजुट हुए माझी बाबा, पारानिक, गोडेत और हातु मुंडाओं ने ‘पॉजिटिव मंत्रा काउंसलिंग प्राइवेट लिमिटेड’ नामक संस्था द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्राम प्रधानों को दिए जा रहे प्रशिक्षण का पूर्ण बहिष्कार किया। प्रतिनिधियों ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया कि पेसा नियमावली 2025 के तहत अब तक पारंपरिक ग्राम सभाओं का न तो सीमांकन हुआ है और न ही इनका विधिवात् सत्यापन किया गया है। ऐसी अधूरी प्रक्रिया के बीच एक निजी संस्था द्वारा प्रशिक्षण आयोजित करना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह सरकारी धन की खुली बर्बादी भी है।
देश पारानिक दुर्गा चरन मुर्मू ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रशासन ने इस प्रशिक्षण की सूचना क्षेत्र के पारंपरिक अगुवाओं को देना तक उचित नहीं समझा। सबसे अधिक आपत्ति प्रशिक्षण की तारीख को लेकर जताई गई, क्योंकि 11 फरवरी को पूरे क्षेत्र में वीर शहीद बाबा तिलका मांझी की जन्म जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। समाज का मानना है कि इस महत्वपूर्ण दिन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना बाबा तिलका मांझी और आदिवासी गौरव का अपमान करने जैसा है, जिसे समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था ने इस संदर्भ में माननीय मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत करने का निर्णय लिया है।

पारानिक बाबा ने स्पष्ट किया कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं का संचालन रूढ़िजन्य विधि के अनुसार ही होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गैर-कानूनी ढंग से नियुक्त किए गए गैर-आदिवासी ग्राम प्रधानों को अविलंब पदमुक्त किया जाए और पारंपरिक व्यवस्था के तहत वास्तविक अगुवाओं को उनका अधिकार दिया जाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सेन बसु हांसदा, बिरसिंह बास्के, बिपिन चंद्र मुर्मू, बिंदे सोरेन और मोहन मंडी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिन्होंने जमशेदपुर बीडीओ को ज्ञापन सौंपकर प्रशिक्षण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।



