
जमशेदपुर।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब महज दो दिन का समय शेष रह गया है। ऐसे में बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दलों के बीच नैरेटिव (विमर्श) बनाने और बिगाड़ने की जंग अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनावों में अक्सर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता है, लेकिन इस बार बंगाल चुनाव में स्थानीय खानपान भी एक बड़ा सियासी हथियार बन गया है। परसों झाड़ग्राम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘झालमुढ़ी’ खाते हुए एक तस्वीर ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था, और अब इसी सियासी कड़ी में एक और तस्वीर सोशल मीडिया पर छाई हुई है जिसने चुनावी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।
ममता बनर्जी के ‘बैन’ वाले दावे का सटीक जवाब
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन की एक तस्वीर कल शाम से इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें वे पारंपरिक बंगाली अंदाज में “माछ-भात” (मछली-चावल) खाते हुए नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता द्वारा इस तस्वीर को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस चुनावी दुष्प्रचार का कड़ा जवाब माना जा रहा है। दरअसल, ममता बनर्जी ने अपनी रैलियों में यह दावा किया था कि अगर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार आती है, तो राज्य के लोगों के खानपान पर पाबंदी लगा दी जाएगी और विशेष रूप से मीट, मछली और अंडे के सेवन पर पूरी तरह से बैन लगा दिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर और कैप्शन
पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने अपनी इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर साझा किया है। इस तस्वीर के साथ उन्होंने एक बेहद दिलचस्प कैप्शन भी लिखा है – “पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के बीच माछ-भात का आनंद लेते हुए।” कल शाम पोस्ट होने के बाद से ही यह तस्वीर इंटरनेट पर आग की तरह फैल गई है और अब तक इसे लाखों लोगों द्वारा देखा और शेयर किया जा चुका है। पोस्ट के कमेंट बॉक्स में यूजर्स की भारी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई लोगों ने इसे ममता बनर्जी और टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) की राजनीति का सबसे बेहतरीन, शांत और शालीन जवाब करार दिया है।
झाड़ग्राम से खड़गपुर तक खानपान की राजनीति
पश्चिम बंगाल की संस्कृति में झालमुढ़ी और माछ-भात का एक खास और भावनात्मक स्थान है। झाड़ग्राम से लेकर खड़गपुर तक हर चौक-चौराहों, चाय की दुकानों और नुक्कड़ पर अब इन्ही तस्वीरों की व्यापक चर्चा हो रही है। बहरहाल, बंगाल के जनमानस के दिल में बसे इन खास व्यंजनों के साथ नजदीकी दिखा कर भाजपा ने चुनाव में एक बेहद सटीक दांव खेला है। इसके जरिए पार्टी ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि वह बंगाल की संस्कृति और खानपान का पूरा सम्मान करती है। जमीन पर इस तस्वीर और नैरेटिव का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है।
मतदान और नतीजों की तारीख
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को महत्वपूर्ण मतदान होना है। इस चुनाव में मुख्य रूप से भाजपा और टीएमसी के बीच सीधी और कांटे की टक्कर है। जनता जनार्दन किस पार्टी के नैरेटिव पर अपना भरोसा जताती है, इसका अंतिम फैसला 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों के साथ स्पष्ट हो जाएगा।
