


Ranchi. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एनएचएआई के विवाद समाधान बोर्ड के एक सदस्य और राजमार्ग प्राधिकरण के दो उप प्रबंधकों को निजी अवसंरचना कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. एजेंसी ने झारखंड के पलामू जिले में एनएच 39 परियोजना के संबंध में 10 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत लेने के मामले में विवाद समाधान बोर्ड सदस्य के रूप में तैनात पूर्व इंजीनियर राकेश भसीन और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के उप प्रबंधक स्वतंत्र गौरव और विश्वजीत सिंह को गिरफ्तार किया है.
सीबीआई ने इस मामले में भारत वाणिज्य ईस्टर्न प्राइवेट लिमिटेड (बीवीईपीएल) के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) मनीष मिश्रा और उनके कर्मचारी उमेश माथुर को भी गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दिनेशचंद्र आर अग्रवाल इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को झारखंड में नेशनल हाइवे-39 (पुरानी एनएच-75) के पलामू जिले में स्थित भोगू गांव से शंखा गांव के बीच एक राजमार्ग को चार लेन का बनाने के लिए एनएचएआई का 818 करोड़ रुपये का अनुबंध मिला था. कंपनी ने इस परियोजना को 769.36 करोड़ रुपये की लागत से एक निजी कंपनी बीवीईपीएल को दे दिया.
सीबीआई की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कथित कदाचार का मामला गुणवत्ता ऑडिट टीम से संबंधित है, जिसमें भसीन, गौरव और सिंह शामिल थे. टीम ने 26 जून से 30 जून, 2025 के बीच परियोजना की गुणवत्ता का आकलन किया था.
आरोप है कि बीवीईपीएल के सीओओ मिश्रा ने अपने कर्मचारी माथुर को भसीन को पांच लाख रुपये और सिंह को एक लाख रुपये देने का निर्देश दिया था ताकि अनुकूल ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त की जा सके. अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने एक अभियान चलाया जिसके दौरान भसीन, गौरव, सिंह, माथुर और मिश्रा को गिरफ्तार किया गया.



