
Ranchi. झारखंड हाइकोर्ट ने रिश्वत मांगने और लेने के मामले में दोषी ठहराये गये धनबाद के पूर्व सहायक श्रम आयुक्त अनिल कुमार सिंह को राहत दी है. हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत, धनबाद द्वारा 28 सितंबर 2016 को सुनायी गयी सजा को रद्द करते हुए उनकी अपील स्वीकार कर ली. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग, स्वीकार करने और आरोपी के कब्जे से रकम बरामद होने के मूल तथ्यों को विश्वसनीय साक्ष्य से साबित नहीं कर सका. अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को “अवैध, कारणरहित और महत्वपूर्ण साक्ष्य पर विचार नहीं करने पर आधारित” माना. अनिल कुमार सिंह पहले से जमानत पर थे. अदालत ने उन्हें जमानत बांड की देनदारी से मुक्त कर दिया और जमानतदारों को भी मुक्त कर दिया.
अनिल कुमार सिंह के खिलाफ आरसी केस संख्या 01(ए)/2002-डी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया था. सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें धारा 7 के तहत दो वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना और धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी. दोनों सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया था.
दरअसल, यह मामला साल 2002 का है.
उस समय अनिल कुमार सिंह धनबाद के मुरीली नगर स्थित क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय में सहायक श्रम आयुक्त के पद पर कार्यरत थे. शिकायतकर्ता करा भुइयां ने आरोप लगाया था कि उनके माता-पिता स्वर्गीय तिलक भुइयां और अकली भुइनी की बीसीसीएल से संबंधित ग्रेच्युटी राशि के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आरोपी ने पांच हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी. शिकायतकर्ता ने 21 मई 2002 को सीबीआई के एसपी से शिकाय की थी. शिकायत के सत्यापन के बाद सीबीआई ने 22 मई 2002 को सरायढेला मेन रोड स्थित भारत मेडिकल के सामने ट्रैप किया. शिकायतकर्ता ने ट्रैप कार्रवाई के लिए 3,750 रुपये दिये थे.
